नींद की कमी से दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। जानें नींद और हार्ट हेल्थ का गहरा संबंध, साथ ही सही नींद के उपाय जो आपके दिल को स्वस्थ रखें।
नींद की कमी केवल थकान नहीं बढ़ाती, बल्कि यह दिल की बीमारियों का खतरा भी बढ़ा सकती है। यदि आप पर्याप्त नींद नहीं ले रहे हैं तो आपके दिल पर इसका गहरा असर हो सकता है। जानिए नींद और हार्ट हेल्थ के बीच गहरे संबंध के बारे में।
नींद की कमी और दिल की बीमारी का संबंध
लगातार नींद की कमी (Chronic Sleep Deprivation) के कारण शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं। इन बदलावों के कारण दिल की समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। विशेषज्ञ डॉ. शालिनी सिंह के अनुसार, “अच्छी नींद हमारे शरीर के लिए एक तरह से दवा है। सोने के दौरान हमारा शरीर रिपेयर मोड में चला जाता है, जिससे हार्मोनल बैलेंस और शरीर की कार्यप्रणाली सही रहती है।”
नींद की कमी से होने वाली समस्याएं:
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हाई ब्लड प्रेशर: लगातार नींद पूरी न होने पर रक्तचाप बढ़ सकता है, जिससे दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ता है।
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स्ट्रेस हार्मोन: नींद की कमी से शरीर में तनाव हार्मोन का स्तर बढ़ता है, जिससे हार्ट अटैक का जोखिम दोगुना हो सकता है।
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ब्लड शुगर लेवल: नींद की कमी से ब्लड शुगर लेवल असंतुलित हो सकता है, जिससे डायबिटीज और दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ता है।
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नींद की कमी के अन्य नुकसान
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लगातार थकान और सिरदर्द।
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दिमागी कार्यप्रणाली में कमी।
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वजन बढ़ने का खतरा।
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कमजोर इम्यूनिटी, जिससे बार-बार सर्दी-जुकाम और संक्रमण होते हैं।
नींद पूरी करने के प्रभावी उपाय
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एक नियमित सोने का समय बनाएं: रोजाना एक ही समय पर सोने और जागने की आदत डालें।
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सोने से पहले स्क्रीन टाइम कम करें: सोने से पहले मोबाइल, लैपटॉप और टीवी का इस्तेमाल कम से कम करें।
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व्यायाम और योग करें: दिन में हल्का व्यायाम और योग करके शरीर को रिलैक्स रखें।
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हल्का और पौष्टिक भोजन लें: रात का खाना हल्का और पौष्टिक रखें ताकि शरीर को पूरी तरह से आराम मिले।
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कैफीन से बचें: कैफीन का सेवन रात में बिल्कुल न करें।
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मेडिटेशन और शांत संगीत: सोने से पहले मेडिटेशन करें या शांत संगीत सुनें, इससे मानसिक शांति मिलती है।
नींद और सेहत
नींद केवल आराम नहीं, बल्कि सेहत के लिए भी बहुत जरूरी है। यदि आप लगातार नींद की कमी से जूझ रहे हैं, तो इसे नजरअंदाज न करें। यह आगे चलकर दिल की बीमारियों और कई अन्य गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है। जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव करें, नींद को प्राथमिकता दें, और यदि समस्या बढ़े तो डॉक्टर से सलाह लें।