दिल्ली में 3,330 नई इलेक्ट्रिक बसों की मांग, ग्रीन ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा और प्रदूषण कम करने के लिए सरकार की रणनीति। मार्च तक 5,000+ ई-बसें परिचालन में।
राजधानी में प्रदूषण और ट्रैफिक को कम करने के लिए दिल्ली सरकार ने 3,330 अतिरिक्त इलेक्ट्रिक बसों की मांग केंद्र सरकार से की है। यह कदम दिल्ली की हरित परिवहन नीति का अहम हिस्सा है, जिससे शहर में सार्वजनिक परिवहन पूरी तरह पर्यावरण-मित्र बनेगा।
परिवहन नेटवर्क में सुधार
दिल्ली सरकार ने राजधानी के ट्रैफिक और एयर क्वालिटी सुधार के लिए तुरंत प्रभाव से 3,330 नई ई-बसों की खरीद का प्रस्ताव भेजा है। इन बसों में सात मीटर लंबाई वाली छोटी बसें भी शामिल होंगी, जिन्हें संकरी गलियों और भीतरी इलाकों में चलाया जा सकेगा। इससे ऐसे क्षेत्रों तक भी सार्वजनिक परिवहन पहुंचेगा, जहां अब तक बस सेवा सीमित थी।
केंद्र के साथ समन्वय
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि स्वच्छ हवा और किफायती सार्वजनिक परिवहन सरकार की शीर्ष प्राथमिकताएं हैं। केंद्र की Convergence Energy Services Limited के साथ बैठक के बाद पीएम ई-ड्राइव योजना के दूसरे चरण में दिल्ली के लिए अतिरिक्त बसों का कोटा बढ़ाया गया है।
सब्सिडी में अड़चन आने पर दिल्ली सरकार करेगी खर्च उठाना
मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर इन नई बसों पर केंद्र की सब्सिडी नहीं मिलती है तो दिल्ली सरकार स्वयं परियोजना की लागत वहन करने के लिए तैयार है।
निजी वाहनों पर निर्भरता घटेगी
नई ई-बसों के परिचालन से लोग निजी वाहनों की बजाय पब्लिक ट्रांसपोर्ट का अधिक उपयोग करेंगे। इससे प्रदूषण में कमी आएगी और शहर की हवा और सड़कें साफ-सुथरी होंगी।
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मार्च तक 5,000 से अधिक ई-बसें चालू होंगी
सरकार का लक्ष्य है कि मार्च तक दिल्ली में 5,000 से अधिक इलेक्ट्रिक बसें परिचालन में आ जाएं और वर्ष के अंत तक यह संख्या 7,000 तक पहुंच जाएगी। इससे दिल्ली देश के उन प्रमुख शहरों में शामिल हो जाएगी, जहां सबसे बड़े ई-बस बेड़े का संचालन होगा।
बसों का वितरण और लंबाई
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कुल 3,330 नई बसों में से 500 बसें सात मीटर लंबी होंगी, जो संकरी गलियों और लास्ट माइल कनेक्टिविटी के लिए उपयोग होंगी।
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2,330 नौ मीटर लंबी बसें फीडर रूट और छोटी सड़कों पर चलेंगी।
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500 बारह मीटर लंबी बसें मुख्य मार्ग और हाई-डेंसिटी कॉरिडोर पर परिचालन के लिए होंगी।
दिल्ली में कुल ई-बस बेड़ा
पहले चरण में 2,800 बसें शामिल होने के बाद कुल ई-बसें 10,430 हो जाएंगी। दूसरे चरण में 3,330 बसें जोड़ने के बाद यह संख्या लगभग 13,760 तक पहुंच जाएगी, जिससे राजधानी की परिवहन क्षमता और पर्यावरणीय लाभ दोनों में सुधार होगा।