जब शरीर थका हुआ महसूस करने लगे, नींद पूरी न हो रही हो, चिड़चिड़ापन बना रहता हो या मांसपेशियों में खिंचाव महसूस हो, तो समझ लें कि आपके शरीर को गहराई से आराम और देखभाल की जरूरत है। ऐसे समय में Oil Massage यानी अभ्यंग बेहद लाभदायक साबित हो सकती है।
आयुर्वेद में अभ्यंग के लाभ
आयुर्वेद में अभ्यंग को स्वास्थ्य के लिए अत्यंत उपयोगी माना गया है। यह सिर्फ शरीर को आराम देने वाला उपाय नहीं, बल्कि यह आंतरिक रूप से सेहत को संतुलित और मजबूत बनाने में भी मदद करता है। जब हल्के हाथों से गर्म तेल से शरीर की मालिश की जाती है, तो यह थकान, मांसपेशियों में जकड़न और तनाव को दूर करता है। साथ ही, रक्त संचार को भी बेहतर बनाता है जिससे शरीर के हर हिस्से तक ऑक्सीजन और पोषक तत्व पहुंचते हैं, जिससे ऊर्जा और स्फूर्ति महसूस होती है।
अभ्यंग एक ऐसा पारंपरिक अभ्यास है जो शरीर, मन और आत्मा को संतुलन में लाता है। इसे घर पर भी आसानी से किया जा सकता है—बस सही जानकारी और तकनीक जरूरी है। शुरुआत उपयुक्त तेल के चयन से होती है।
तेल का चयन: आपकी प्रकृति के अनुसार
व्यक्ति के शरीर को तीन दोषों—वात, पित्त और कफ—में बांटा गया है।
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वात दोष: तिल का तेल या अश्वगंधा तेल
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पित्त दोष: नारियल तेल या चंदन युक्त तेल
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कफ दोष: सरसों तेल या त्रिफला तेल
तेल को हल्का गर्म करना चाहिए ताकि वह त्वचा में अच्छी तरह से अवशोषित हो सके।
अभ्यंग कैसे करें?
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शरीर की प्रकृति के अनुसार तेल चुनें।
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तेल को गुनगुना करके शरीर पर लगाएं।
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मालिश के दौरान अंगुलियों को गोलाकार (clockwise और anti-clockwise) घुमाएं।
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पूरी बॉडी पर तेल लगाने के बाद 20-30 मिनट तक छोड़ दें ताकि यह भीतर तक असर कर सके।
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इसके बाद गुनगुने पानी से स्नान करें। रासायनिक साबुन की बजाय बेसन, मुल्तानी मिट्टी या आयुर्वेदिक उबटन का प्रयोग करें।
नियमित मालिश के फायदे
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तनाव और थकान में राहत
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अच्छी नींद और मानसिक शांति
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जोड़ों के दर्द और जकड़न में आराम
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त्वचा को पोषण, नमी और चमक
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उम्र के असर को धीमा करना
जब भी शरीर थका हो, नींद न आ रही हो, स्किन रुखी लग रही हो या मन बेचैन हो—ऐसे में अभ्यंग यानी तेल मालिश एक असरदार और प्राकृतिक समाधान हो सकता है। यह न सिर्फ शरीर को राहत देता है, बल्कि मन को भी शांति पहुंचाता है और सेहत को लंबे समय तक संतुलित बनाए रखने में सहायक है।