8वें वेतन आयोग 2026: पुराने पेंशन की बहाली, 7% सालाना इंक्रीमेंट और 54,000 न्यूनतम वेतन की मांग पर ड्राफ्टिंग कमेटी की बैठक नई दिल्ली में शुरू। जानें कर्मचारियों की प्रमुख मांगें और अपडेट।
नई दिल्ली में 8वें वेतन आयोग को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनधारियों की उम्मीदें लगातार बढ़ रही हैं। केंद्र सरकार ने कर्मचारियों और संगठनों से सुझाव मांगे हैं, ताकि वेतन, पेंशन और भत्तों से जुड़े प्रस्तावों पर विचार किया जा सके। इसी कड़ी में National Council JCM (स्टाफ साइड) की ड्राफ्टिंग कमेटी की बैठक शुरू हो चुकी है।
यह बैठक करीब एक सप्ताह तक चलेगी और इसमें लगभग 1.2 करोड़ कर्मचारियों और पेंशनधारियों की मांगों को शामिल करते हुए एक साझा ज्ञापन (कॉमन मेमोरेंडम) तैयार किया जाएगा। यह ज्ञापन आठवें वेतन आयोग के समक्ष पेश किया जाएगा। बैठक नई दिल्ली के जनपथ स्थित चंद्रलोक बिल्डिंग में आयोजित की गई है, जहां आयोग को कार्यालय उपलब्ध कराए जाने से इस प्रक्रिया में तेजी का संकेत मिलता है।
8वें वेतन आयोग की अध्यक्षता रंजना देसाई कर रही हैं। बैठक में कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में वेतन संरचना, फिटमेंट फैक्टर, भत्ते और पेंशन से जुड़े मुद्दे शामिल हैं।
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कर्मचारियों की प्रमुख मांगें
फिटमेंट फैक्टर और इंक्रीमेंट: कर्मचारी संगठनों का कहना है कि आगामी वेतन में 3.25 फिटमेंट फैक्टर और 7% वार्षिक इंक्रीमेंट लागू होना चाहिए। इससे बेसिक सैलरी में वृद्धि होगी और वेतन ढांचा अधिक संतुलित बनेगा।
पुराने पेंशन की बहाली: कर्मचारी संगठन पेंशनधारियों के पुराने पेंशन सिस्टम की बहाली की मांग कर रहे हैं, ताकि सेवानिवृत्त कर्मियों को समान अधिकार मिल सके।
लीव एन्कैशमेंट सीमा: अभी यह सीमा 300 दिन है। कर्मचारियों का सुझाव है कि इसे 400 दिन किया जाए, जिससे लंबी सेवा देने वालों को अधिक लाभ मिले।
फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस: जहां CGHS सुविधा उपलब्ध नहीं है, वहां मासिक मेडिकल अलाउंस 1,000 रुपये से बढ़ाकर 20,000 रुपये किया जाए, ताकि इलाज के खर्च को आसानी से कवर किया जा सके।
ड्राफ्टिंग कमेटी का उद्देश्य
ड्राफ्टिंग कमेटी विभिन्न कर्मचारी संगठनों से सुझाव लेकर एक संगठित ज्ञापन तैयार करेगी। इसका उद्देश्य सभी मांगों को व्यवस्थित रूप से सरकार और 8वें वेतन आयोग तक पहुंचाना है। ज्ञापन को अंतिम रूप देने से पहले करीब एक सप्ताह तक विचार-विमर्श किया जाएगा, ताकि कोई भी अहम मुद्दा छूट न जाए।
कर्मचारियों का मानना है कि अगर इन प्रस्तावों को मंजूरी मिलती है तो वेतन और भत्तों में वास्तविक सुधार होगा और बढ़ती महंगाई के समय कर्मचारियों को राहत मिलेगी।