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JP Nadda: अब बीजेपी अध्यक्ष पद पर किसकी ताजपोशी होगी, जेपी नड्डा राज्यसभा के नेता होंगे; अटकलें तेज
JP Nadda: राज्यसभा में जेपी नड्डा नेता सदन का नेतृत्व करेंगे। उन्होंने मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में स्वास्थ्य मंत्री का पदभार संभाला है। पीयूष गोयल, जो पहले राज्यसभा के नेता थे, अब लोकसभा में हैं।
JP Nadda: राज्यसभा में जेपी नड्डा नेता सदन का नेतृत्व करेंगे। उन्होंने मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में स्वास्थ्य मंत्री का पदभार संभाला है। इस बार मुंबई की एक सीट से जीतकर पीयूष गोयल पहले राज्यसभा के नेता बने हैं। ऐसे में पार्टी ने राज्यसभा में सबसे वरिष्ठ नेता जेपी नड्डा को बड़ी भूमिका दी है। उन्हें भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद से हटाने की चर्चा चल रही है, और उनके उत्तराधिकारी की पार्टी ने तलाश शुरू कर दी है। भाजपा अगले कुछ महीनों में एक नए अध्यक्ष का नाम घोषित कर सकती है।

भाजपा ने अक्सर एक व्यक्ति, एक पद की नीति अपनाई है। यही कारण है कि जेपी नड्डा की जगह भाजपा पार्टी किसी और नेता को ही पार्टी अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपेगी। नेताओं में विनोद तावड़े, सुनील बंसल और अनुराग ठाकुर उनके विकल्प के तौर पर चर्चा में हैं। फिलहाल, अगले कुछ महीनों में पांच राज्यों (हरियाणा और महाराष्ट्र) में चुनाव होने हैं। ऐसे में यह भी चर्चा है कि भाजपा की ओर से कुछ दिनों के लिए जेपी नड्डा और सेवा विस्तार मिल सकता है। उस अवधि में उनका काम करने में मदद करने के लिए एक कार्यकारी अध्यक्ष दिया जा सकता है।
अध्यक्ष नहीं रहेंगे, लेकिन बरकरार रहेगा जेपी नड्डा का पद
2020 में, जेपी नड्डा से पहले होम मिनिस्टर अमित शाह ने पार्टी की कमान संभाली। बीते कुछ सालों में जेपी नड्डा का कद बढ़ा है। उन पर खासतौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गहरा भरोसा है। ऐसे में, नड्डा को मंत्री पद देना और फिर राज्यसभा में उनका नेता बनाना भी उनके पद को बचाने का प्रयास है। गौरतलब है कि भाजपा में अध्यक्ष पद के लिए कई नामों पर चर्चा चल रही है, और संघ से समझौता होने के बाद यह निर्णय लिया जा सकता है। संघ की लीडरशिप यहां तक कहती है कि वे शिवराज सिंह चौहान या राजनाथ सिंह को पार्टी अध्यक्ष बनाना चाहते हैं। प्रधानमंत्री मोदी, हालांकि, दूसरे नेता के पक्ष में हैं।
Haryana: कांग्रेस हरियाणा में फंसी हुई है, लोकसभा जीते पर राज्यसभा सीट खोने का खतरा; क्रॉस वोटिंग का भय
Haryana: हरियाणा विधानसभा में भाजपा का बहुमत है। क्रॉस वोटिंग भी हो सकती है। भाजपा ऐसी स्थिति में हुड्डा की यह सीट पा सकती है। कांग्रेस इससे मुश्किल में आ गई है।
कांग्रेस नेता दीपेंदर हुड्डा ने हरियाणा की रोहतक लोकसभा सीट से जीत हासिल की है। अब उन्हें राज्यसभा से इस्तीफा देना होगा, जहां दोबारा चुनाव होगा। कांग्रेस को लोकसभा में एक सीट मिली है, लेकिन राज्यसभा में एक सीट खो देने का भी खतरा है। इसका कारण हरियाणा विधानसभा के अधिकांश सदस्य भाजपा के पक्ष में हैं। क्रॉस वोटिंग भी हो सकती है। भाजपा ऐसी स्थिति में हुड्डा की यह सीट पा सकती है। दुष्यंत चौटाला की जननायक जनता पार्टी से विधायक और कुछ निर्दलीय क्रॉस वोटिंग कर सकते हैं। ऐसा हुआ तो कांग्रेस को फिर से जीत मिलना असम्भव होगा।
Haryana: 2020 में दीपेंदर हुड्डा ने राज्यसभा में पदार्पण किया और 2026 तक के लिए था। वर्तमान हालात में भाजपा मजबूत दिखती है। उसके पक्ष में विधायकों के अलावा जेजेपी का एक गुट, विधायक वाली पार्टियां और कुछ निर्दलीय हैं। नियम कहता है कि लोकसभा के लिए चुना गया राज्यसभा का सांसद अपनी सीट छोड़ देना चाहिए। रोहतक में जीत के बाद दीपेंदर हुड्डा की राज्यसभा सीट खाली हो गई है। अब राज्यसभा सीट पर उपचुनाव के लिए चुनाव आयोग को सूचना देना होगा। नियम के अनुसार चुनाव छह महीने के भीतर होना चाहिए।
विधानसभा चुनाव से पहले इस सीट पर चुनाव हो सकता है। अब कांग्रेस विधायक वरुण चौधरी अंबाला लोकसभा सीट से चुने गए हैं। इसलिए विधानसभा की संख्या सिर्फ 87 है। यहाँ बहुमत का सिर्फ आंकड़ा 44 है। वहीं, जेजेपी के कुल दस विधायक हैं, लेकिन विभिन्न क्षेत्रों में मतभेद हैं। दो विधायकों ने खुलकर भाजपा का साथ दिया है। उसके एक विधायक देवेंदर सिंह बबली तो कांग्रेस का लोकसभा चुनाव में समर्थन कर चुके हैं। इसके अलावा एक अन्य विधायक रामकुमार गौतम भी जेजेपी लीडरशिप से नाराज हैं। राज्य में कांग्रेस के 29 विधायक हैं और उसे तीन का समर्थन हासिल है। इस तरह विपक्ष की संख्या राज्य में 32 है।
जेजेपी के कुछ और विधायक कर सकते हैं क्रॉस वोटिंग
वहीं भाजपा के 41 विधायक हैं और गोपाल कांडा एवं नयनपाल रावत का उसे समर्थन हासिल है। इनोलो के इकलौते विधायक अभय चौटाला और निर्दलीय बलराज कुंडू अब तक भाजपा के खिलाफ ही रहे हैं। लेकिन जेजेपी के कुछ और विधायक क्रॉस वोटिंग कर सकते हैं। बता दें कि राज्यसभा में विधायक किसी भी कैंडिडेट को वोट कर सकते हैं और उन पर कोई दल ऐक्शन भी नहीं ले सकता। ऐसे ही एक मामले में फैसला सुनाते हुए 22 अगस्त, 2006 को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि विधायक यदि राज्यसभा में दूसरे दल के नेता को वोट करता है तो उसकी मेंबरशिप खारिज नहीं हो सकती।
दिल्ली CM Arvind Kejriwal ने अंतरिम बेल मांगने पर कहा कि उनकी तहेदिल से इच्छा है कि केजरीवाल मर जाए
भाजपा को आड़े हाथों लेते हुए CM Arvind Kejriwal ने कहा कि उनकी तहेदिल से इच्छा है कि अरविंद केजरीवाल मर जाए। उन्होंने कहा, “मैंने तो सिर्फ इसलिए 7 दिनों की अंतरिम बेल मांगी है ताकि कुछ टेस्ट करा लूं।
आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट से सात दिनों की अंतरिम बेल मांगे जाने पर उठे प्रश्नों पर स्पष्ट प्रतिक्रिया दी है। भाजपा को आड़े हाथों लेते हुए केजरीवाल ने कहा कि वे अरविंद केजरीवाल की मृत्यु चाहते हैं। उसने कहा, “मैंने सिर्फ अपने टेस्ट कराने के लिए 7 दिनों की अंतरिम बेल मांगी है।” एक महीने में मेरा वजन सात किलो गिर गया है। एक महीने में सात किलो वजन कम होना गंभीर संकेत हो सकता है। डॉक्टरों ने मुझे कई जांच कराने का आदेश दिया है।’
उसने कहा, ‘मैंने इसके लिए सिर्फ एक सप्ताह मांगा है.’ वजन घटना बिना किसी कारण के चिंताजनक है। शरीर में शायद कोई गंभीर बीमारी फैल रही हो, जिसका पता नहीं चल रहा है। ऐसी स्थिति में ये जांच करानी होगी। बीमारी का दूसरा या तीसरा चरण बहुत देर हो जाएगा।अरविंद केजरीवाल ने भी अमित शाह के बयान पर हमला बोला, जिसमें उन्होंने कहा था कि लोकसभा चुनाव के बाद पंजाब की सरकार नहीं बचेगी।
आखिर पंजाब की सरकार कैसे गिराएंगे अमित शाह? क्या प्लान है
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा, ‘अमित शाह जी से लोग पूछना चाहते हैं कि 117 में से 92 विधायक हैं। आपके पास तीन व्यक्ति हैं। आखिरकार, आप सरकार को कैसे गिरा देंगे? क्या आप पंजाबियों को डराने के लिए ईडी और सीबीआई को भेजेंगे? क्या योजना बनाई गई है, जिससे पंजाब सरकार को गिराना चाहते हैं? पंजाब की जनता ऐसी क्रूरता को बर्दाश्त नहीं करेगी। पंजाब की जनता दिलदार है। प्यार से मांगने पर कुछ सीट भी दे देंगे। इनका एकमात्र लक्ष्य है कि पंजाब के लोगों को मुफ्त बिजली नहीं दी जाए।’
फ्री बिजली चालू रखना चाहते हैं तो पंजाब की 13 सीटें AAP को जिताएं
दिल्ली और पंजाब में भी ये लोग मुझे ऐसी ही धमकी देते हैं। केजरीवाल ने कहा कि पंजाब में फ्री बिजली देना चाहते हैं तो आम आदमी पार्टी को सभी 13 सीटें दें। अगर नहीं, तो ये लोग कुछ भी योजना बना सकते हैं।
Manohar Lal Khattar : भाजपा सरकार से तीन निर्दलीय विधायकों का समर्थन वापस लेने के बाद चौटाला ने फ्लोर टेस्ट की मांग की थी और राज्यपाल को पत्र भी लिखा था। हालाँकि, उनकी ही पार्टी के विधायक अब बागी हो चुके हैं।
जननायक जनता पार्टी के नेता दुष्यंत चौटाला ने बीते कई दिनों से हरियाणा में भाजपा सरकार का अल्पमत होने का सवाल उठाया है। भाजपा सरकार से तीन निर्दलीय विधायकों का समर्थन वापस लेने के बाद चौटाला ने फ्लोर टेस्ट की मांग की थी और राज्यपाल को पत्र भी लिखा था। इस बीच, उनके दल के तीन विधायक मनोहर लाल खट्टर से संपर्क करने लगे। देवेंदर सिंह बबली ने यह भी कहा कि हम पार्टी पर दावा करेंगे और दुष्यंत चौटाला को विधायक दल के नेता पद से हटा देंगे। हाल ही में मनोहर लाल खट्टर ने किया गया एक दावा और गंभीर खतरे की ओर संकेत करता है।
जेजेपी के नेताओं देवेंदर सिंह बबली, रामनिवास सुरजाखेरा और जोगी राम सिहाग ने मनोहर लाल खट्टर से मुलाकात की थी। राज्य मंत्री महीपाल ढांढा के आवास पर बैठक हुई थी। तीनों ने इस बैठक के बाद भाजपा को पूरी तरह से समर्थन देने की घोषणा की। अब खट्टर कहता है कि कुल छह विधायक हमसे संपर्क कर रहे हैं। यदि ऐसा होता है तो जेजेपी को नुकसान होगा और खुद दुष्यंत चौटाला अपनी ही बनाई गई पार्टी से बाहर निकल जाएंगे। पार्टी का दावा करने के लिए दो तिहाई से अधिक विधायकों की आवश्यकता होती है। अगर सात विधायक बागी हो गए तो दुष्यंत चौटाला को पार्टी के विधायक दल के नेता का पद भी खोना पड़ेगा। पार्टी के भी वह मुखिया नहीं रह जाएंगे।
खट्टर ने जेजेपी विधायकों से एक गुप्त बैठक के सवाल पर कहा, ‘आप लोग अच्छे से जानते हैं। कई विधायक हमारे पक्ष में हैं। लेकिन हम बिल्कुल भरोसे से कह सकते हैं कि जेजेपी के छह विधायक हमारे हैं।शनिवार को कांग्रेस के प्रभारी दीपक बाबरिया ने कहा कि भाजपा को गवर्नर बंडारू दत्तात्रेय के सामने अपने विधायकों को पेश करना चाहिए। खट्टर ने इस पर कहा कि विपक्ष सरकार को खतरे में डाल रहा है। ऐसी स्थिति में, उसे अपने विधायकों को खुद ही पेश करना चाहिए।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘कांग्रेस अब अपने विधायकों की लिस्ट पेश करने से भाग रही है। उन्हें घबराहट होनी चाहिए क्योंकि 31 में से 4 या 5 विधायक उनके पक्ष में आ सकते हैं। जेजेपी की घटना आपने देखी ही है। अब वह फंसा हुआ है। वे इस मुद्दे को नहीं उठाना चाहिए था। हम अब कहेंगे कि आप अपने विधायकों को प्रदर्शन करें। यदि आपके नंबर अधिक होंगे तो फ्लोर टेस्ट करेंगे। नई सरकार ने 13 मार्च को विश्वास मत हासिल किया है। ऐसे में छह महीने पूरे होने से पहले ऐसा फिर से नहीं करना चाहिए।’