बार-बार बेहोश होना सिर्फ लो बीपी (BP) का संकेत नहीं होता। अगर यह घटना बार-बार हो रही है, तो इसे नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, बेहोशी का मेडिकल टर्म सिन्कोपी है। यह तब होता है जब दिमाग तक पर्याप्त खून नहीं पहुंच पाता और व्यक्ति अस्थायी रूप से होश खो देता है।
बार-बार बेहोशी के कारण
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हार्ट प्रॉब्लम्स: अगर दिल पर्याप्त खून पंप नहीं कर रहा या दिल की धड़कन अनियमित है, तो अचानक बेहोशी आ सकती है। हार्ट से जुड़ी बेहोशी में अक्सर बिना चेतावनी के अचानक फॉरम होती है, साथ में सीने में दर्द, सांस फूलना या तेज धड़कन भी हो सकती है।
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डिहाइड्रेशन और लो ब्लड शुगर: लंबे समय तक पानी न पीना या नाश्ता छोड़ना चक्कर और अस्थायी बेहोशी का कारण बन सकता है।
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न्यूरोलॉजिकल समस्याएं: स्ट्रोक या नर्वस सिस्टम की समस्या भी बेहोशी का कारण बन सकती है।
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एनीमिया और हार्मोनल इश्यू: गंभीर एनीमिया या हार्मोन असंतुलन से बार-बार बेहोशी हो सकती है।
शरीर पर असर
70 साल से अधिक उम्र के लोगों में यह समस्या ज्यादा देखी जाती है। बेहोशी के दौरान व्यक्ति अस्थायी रूप से होश खो देता है और कभी-कभी इसके बाद भ्रम या कमजोरी महसूस होती है।
लाइफस्टाइल टिप्स
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पर्याप्त पानी पीएं।
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लंबे समय तक खड़े न रहें।
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भीड़-भाड़ वाले स्थानों से बचें।
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संतुलित आहार लें और नियमित व्यायाम करें।
डॉक्टर से कब मिलना जरूरी
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बार-बार बेहोशी हो रही हो।
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बेहोशी एक मिनट से ज्यादा समय तक रहे।
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बिना किसी चेतावनी के अचानक बेहोश हो जाए।
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बेहोशी के बाद भ्रम या असामान्य स्थिति हो।
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परिवार में हार्ट डिजीज का इतिहास हो।
डॉक्टर खून की जांच, हार्ट मॉनिटरिंग और न्यूरोलॉजिकल टेस्ट कर कारण पता करेंगे। हार्ट से जुड़ी समस्या पाए जाने पर पेसमेकर जैसी मेडिकल मदद भी जरूरी हो सकती है।