Diabetes मरीजों के लिए फैट जरूरी है या नहीं, इस उलझन को दूर करने के लिए एक्सपर्ट्स ने अहम सलाह दी है। डायबिटीज होने के बाद लोग सबसे ज्यादा खाने-पीने को लेकर कन्फ्यूजन में रहते हैं—कोई कहता है फैट बिल्कुल छोड़ दो, तो कोई मानता है कि थोड़ा-बहुत फैट जरूरी है। इसी डर से कई लोग घी-तेल के साथ-साथ ड्राई-फ्रूट्स भी खाना बंद कर देते हैं।
Diabetes के लिए “डायबिटीज प्लेट मेथड” सबसे सही तरीका है। इसमें प्लेट को तीन हिस्सों में बांटा जाता है—50% सब्जियां, 25% प्रोटीन और 25% कार्ब्स। अलग से फैट का सेक्शन न होने से लोग मान लेते हैं कि इसमें वसा नहीं है, जबकि प्रोटीन सोर्स जैसे मछली, चिकन, पनीर, दालें और नट्स में नैचुरल फैट पहले से मौजूद होता है।
फैट शरीर को ऊर्जा देने, हार्मोन बनाने और अंगों की सुरक्षा के लिए जरूरी है, लेकिन इसकी सही मात्रा और हेल्दी सोर्स चुनना Diabetes मरीजों के लिए बेहद अहम है। ज्यादा और अनहेल्दी फैट ब्लड शुगर कंट्रोल बिगाड़ सकता है और मोटापा बढ़ा सकता है।
वे मूंगफली, अखरोट, अलसी के बीज जैसे हेल्दी फैट सोर्स प्लेट में शामिल करने की सलाह देते हैं, क्योंकि इनमें मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड न सिर्फ ब्लड शुगर को कंट्रोल करते हैं, बल्कि दिल की सेहत के लिए भी अच्छे होते हैं।
नतीजा साफ है—फैट को पूरी तरह छोड़ना जरूरी नहीं, बल्कि प्लेट मेथड के जरिए सही मात्रा में और हेल्दी सोर्स से लेना ही बेहतर है। अलग से घी-तेल तभी लें जब डॉक्टर इसकी सलाह दें।