ब्लड शुगर का संतुलन बनाए रखना डायबिटीज (मधुमेह) के मरीजों के लिए बेहद जरूरी है। अगर शुगर नियंत्रण में न रहे, तो इससे किडनी रोग, तंत्रिका संबंधी समस्याएँ, दृष्टि में कमी, स्ट्रोक और हृदय रोग जैसी गंभीर जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं। अक्सर देखा जाता है कि जिन लोगों का ब्लड शुगर अनियंत्रित रहता है, उनमें थकान, कमजोरी और नींद की दिक्कतें आम हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों को ब्लड शुगर में उतार-चढ़ाव के कारणों को समझना और समय पर उपाय करना जरूरी है।
ब्लड शुगर स्पाइक के मुख्य कारण
1. डिहाइड्रेशन: शरीर में पानी की कमी से ब्लड शुगर का स्तर बढ़ सकता है। जब शरीर में तरल पदार्थ कम होते हैं, तो हाइपरग्लाइसेमिया (Hyperglycemia) का खतरा बढ़ जाता है। अधिक पेशाब आने से निर्जलीकरण और भी बढ़ सकता है। इसलिए डायबिटीज वाले मरीज पूरे दिन पर्याप्त मात्रा में पानी या कैलोरी-फ्री ड्रिंक का सेवन करें।
2. नींद की कमी: नींद पूरी न होने पर मूड, ऊर्जा और इंसुलिन संवेदनशीलता प्रभावित होती है। शोध बताते हैं कि नींद की कमी टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों में ग्लूकोज नियंत्रण में बाधा डाल सकती है, जिससे ब्लड शुगर में उतार-चढ़ाव होता है।
3. मासिक धर्म चक्र: महिलाओं में प्रीमेंस्ट्रुअल फेज के दौरान हार्मोनल बदलाव ब्लड शुगर को प्रभावित कर सकते हैं। इस दौरान इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता कम हो सकती है, जिससे शुगर का स्तर ज्यादा या कम रह सकता है।
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ब्लड शुगर को कंट्रोल करने के उपाय
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नियमित व्यायाम – हर दिन हल्का या मध्यम व्यायाम ब्लड शुगर नियंत्रण में मदद करता है।
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तनाव प्रबंधन – मानसिक तनाव बढ़ने से ब्लड शुगर स्पाइक हो सकता है, इसलिए ध्यान, योग या मेडिटेशन करें।
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संतुलित आहार – जंक फूड और अत्यधिक कार्बोहाइड्रेट का सेवन कम करें।
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दवा का सही समय पर सेवन – डॉक्टर की सलाह के अनुसार शुगर की दवाइयां नियमित लें।
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हाइड्रेटेड रहें – पर्याप्त पानी पीते रहें और निर्जलीकरण से बचें।
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नींद पूरी करें – रोजाना 7-8 घंटे की नींद लें।
ब्लड शुगर को नियंत्रित रखना न सिर्फ शारीरिक स्वास्थ्य के लिए जरूरी है, बल्कि जीवन की गुणवत्ता को भी बेहतर बनाता है।