उत्तराखंड में पहली बार चार जिलों में तैनात होंगे जिला जनजाति कल्याण अधिकारी, जिससे जनजाति कल्याण योजनाओं का क्रियान्वयन और तेजी से होगा।
उत्तराखंड सरकार ने तीन लाख से अधिक अनुसूचित जनजाति (ST) आबादी को ध्यान में रखते हुए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य की धामी कैबिनेट ने निर्णय लिया है कि देहरादून, चमोली, ऊधम सिंह नगर और पिथौरागढ़ जैसे अनुसूचित जनजाति बाहुल्य जिलों में पहली बार जिला जनजाति कल्याण अधिकारी तैनात किए जाएंगे।
इस कदम से जनजाति कल्याण विभाग की योजनाओं के क्रियान्वयन में और तेजी आएगी। पहले इन जिलों में योजनाओं का संचालन समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों द्वारा किया जाता था, लेकिन अब संबंधित जिलों में विशेष अधिकारी की नियुक्ति से कामकाज और प्रभावी होगा।
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नियमावली में संशोधन और पद सृजन
उत्तराखंड कैबिनेट ने उत्तराखंड जनजाति कल्याण राजपत्रित अधिकारी सेवा संशोधन नियमावली-2025 को प्रख्यापित करने की मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य चार जिलों में तैनात अधिकारियों के लिए सेवा नियमावली में पद का प्राविधान करना है। सचिव डॉ. श्रीधर बाबू अद्दांकी के अनुसार, पीएम जोगा, पीएम जनमन जैसी योजनाएं प्रदेश में संचालित हैं, और अब अधिकारियों की नियुक्ति से इन योजनाओं का क्रियान्वयन और अधिक तेजी से किया जा सकेगा।
दो पद होंगे सीधी भर्ती के लिए
जनजाति कल्याण विभाग के निदेशक संजय सिंह टोलिया ने बताया कि चार जिलों में तैनात होने वाले चार जिला जनजाति कल्याण अधिकारियों में से दो पद सीधी भर्ती के माध्यम से भरे जाएंगे, जबकि दो पद विभागीय अधिकारियों से नियुक्त किए जाएंगे। इसमें एक अधिकारी आईटीआई कार्यालय अधीक्षक और दूसरा अधीक्षक आश्रम पद्धति स्कूल से तैनात किया जाएगा।
इस नए ढांचे से उत्तराखंड में अनुसूचित जनजाति कल्याण योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन संभव होगा और इन जिलों में कल्याण गतिविधियों में सुधार आएगा।