जाति भेदभाव और प्रेम कहानी पर आधारित फ़िल्में भारतीय सिनेमा में नई नहीं हैं, लेकिन Dhadak 2 का उद्देश्य यह दिखाना था कि आधुनिक महानगरों में भी जातीय नफ़रत और अत्याचार किस तरह मौजूद हैं। इस विषय को लेकर फ़िल्म से बड़ी उम्मीदें थीं, पर बॉक्स ऑफिस पर यह दर्शकों को खास प्रभावित नहीं कर पाई।
मोहित सूरी की सैयारा की सफलता के बाद ऐसा माना जा रहा था कि रोमांटिक कहानियों का दौर फिर लौटेगा। तृप्ति डिमरी और सिद्धांत चतुर्वेदी की जोड़ी, चर्चित ट्रेलर और गानों के चलते Dhadak 2 की काफी चर्चा हुई, लेकिन रिलीज़ के बाद फिल्म अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सकी। करीब 40 करोड़ के बजट वाली इस फिल्म ने शुरुआती चार दिनों में महज लगभग 14 करोड़ की कमाई की, जो 2018 की पहली धड़क से भी काफी कम है।
कहानी तमिल फिल्म परियेरुम पेरुमल से प्रेरित है और दलित नायक नीलेश अहिरवार और सवर्ण नायिका विधि भारद्वाज के प्रेम पर केंद्रित है। हालांकि, फिल्म में दोनों के रिश्ते की बुनियाद स्पष्ट नहीं की गई, जिससे दर्शकों को यह प्रेम अवास्तविक लगा। इमोशनल कनेक्शन की कमी, कहानी में अनुमानित मोड़, और पात्रों के स्वभाव में अचानक बदलाव जैसी कमजोरियों ने असर घटाया।
संगीत, संवाद और विषय में दम होने के बावजूद, निर्देशन और एडिटिंग में सुधार की गुंजाइश रही। हिंसा को समाधान के रूप में दिखाना भी कुछ दर्शकों को खटका। कुल मिलाकर, धड़क 2 न पूरी तरह निराश करती है, न ही उतना रोमांचित जितनी उम्मीद की जा रही थी।