दिल्ली नगर निगम (MCD) उपचुनाव में भाजपा ने अपनी मजबूत वापसी दर्ज की है। 12 वार्डों में चुनाव लड़ने वाली पार्टी ने 7 सीटों पर जीत हासिल की, जिसमें से 6 महिला उम्मीदवार थीं। इस जीत ने न केवल बीजेपी की राजनीतिक पकड़ मजबूत की, बल्कि महिला नेतृत्व और सशक्तिकरण के प्रयासों को भी जनता की तरफ से समर्थन मिला।
महिला सशक्तिकरण में जनता का भरोसा
दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने प्रेस वार्ता में बताया कि इस बार पार्टी ने 12 में से 8 टिकट महिलाओं को देकर महिला नेतृत्व को आगे बढ़ाने का बड़ा कदम उठाया। इसका परिणाम शानदार रहा, क्योंकि इन 8 में से 6 महिला उम्मीदवारों ने जीत हासिल की। सचदेवा ने कहा कि यह स्पष्ट संकेत है कि दिल्ली की जनता बीजेपी के महिला सशक्तिकरण के प्रयासों का समर्थन कर रही है।
7 सीटों पर जीत और 46% वोट शेयर
बीजेपी ने कुल 12 वार्डों में से 7 पर जीत दर्ज कर अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत की। उपचुनाव में पार्टी को लगभग 46% वोट शेयर मिला, जो यह दर्शाता है कि दिल्ली की जनता में बीजेपी अभी भी लोकप्रिय विकल्प बनी हुई है। पार्टी अध्यक्ष ने पार्टी कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के सघन प्रचार अभियान को जीत का मुख्य कारण बताया।
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AAP की बयानबाज़ी और बीजेपी का पलटवार
सचदेवा ने AAP नेताओं की उपचुनाव के नतीजों पर बयानबाज़ी को उनकी हार और हताशा का परिणाम बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि टिकट वितरण में गड़बड़ी और मुस्लिम वोट बैंक में दरार जैसे मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए AAP नेता बहाने खोज रहे हैं। अशोक विहार और नारायणा वार्ड के नतीजों पर सवाल उठाने पर सचदेवा ने कहा कि AAP की जीत-हार का अंतर बेहद कम रहा, जबकि बीजेपी ने साफ जीत दर्ज की।
मुस्लिम वोट बैंक में बदलाव का दावा
वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि चांदनी महल वार्ड में टिकट चयन को लेकर स्थानीय मुस्लिम नेताओं की नाराज़गी ने परिणाम को प्रभावित किया। उन्होंने दावा किया कि इस गलती का असर AAP की हार के रूप में सामने आया। वहीं, बीजेपी मीडिया प्रमुख प्रवीण शंकर कपूर ने कहा कि AAP कार्यकर्ता भी नेतृत्व से टिकट वितरण में हुई गलतियों पर सवाल कर रहे हैं।
बैठक में शामिल वरिष्ठ नेता
इस अवसर पर प्रदेश उपाध्यक्ष और विधायक राजकुमार भाटिया, बीजेपी प्रवक्ता शुभेन्दू शेखर अवस्थी, यासीर जिलानी और मीडिया प्रमुख विक्रम मित्तल भी उपस्थित थे।
बीजेपी की इस जीत ने न केवल पार्टी की राजनीतिक स्थिति को मजबूत किया है, बल्कि महिला नेतृत्व और संगठन की सक्रियता को भी जनता की तरफ से स्पष्ट समर्थन मिला है।