अपरा एकादशी 2026: अपरा एकादशी हिंदू धर्म में भगवान विष्णु को समर्पित एक महत्वपूर्ण व्रत माना जाता है। साल 2026 में यह पावन व्रत 13 मई को मनाया जाएगा। इसे अचला एकादशी के नाम से भी जाना जाता है और माना जाता है कि यह व्रत जीवन में सुख, समृद्धि और मोक्ष प्रदान करता है।
अपरा एकादशी 2026 तिथि
पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 12 मई को दोपहर से शुरू होकर 13 मई को दोपहर तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार व्रत 13 मई 2026 को रखा जाएगा।
अपरा एकादशी का महत्व
अपरा एकादशी को “असीमित फल देने वाली एकादशी” भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट होते हैं और जीवन में उन्नति व धन-समृद्धि प्राप्त होती है। यह व्रत भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा पाने का श्रेष्ठ माध्यम माना जाता है।
also read: गंगा दशहरा 2026: 25 मई को मनाया जाएगा पर्व, जानें…
क्यों कहलाती है भद्रकाली एकादशी?
भारत के कई हिस्सों में इस एकादशी को अलग-अलग नामों से जाना जाता है। पंजाब, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर में इसे भद्रकाली एकादशी कहा जाता है, जहां इस दिन देवी भद्रकाली की पूजा का विशेष महत्व होता है। वहीं ओडिशा में इसे जलक्रीड़ा एकादशी के रूप में मनाया जाता है, जो भगवान जगन्नाथ को समर्पित होती है।
अपरा एकादशी पूजा विधि
इस दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान विष्णु की पूजा करें। पीले फूल, पीले वस्त्र, चंदन और तुलसी दल अर्पित करना शुभ माना जाता है। “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। व्रत के दौरान पंचामृत और आटे की पंजीरी का भोग लगाया जाता है और तुलसी दल का विशेष महत्व होता है।
व्रत के नियम
इस दिन तामसिक भोजन से दूर रहना चाहिए। चावल, जड़ वाली सब्जियां, बाल और नाखून काटना वर्जित माना गया है। दिन की शुरुआत भगवान विष्णु के स्मरण से करनी चाहिए और मन को भक्ति में लगाना चाहिए।
पौराणिक कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, राजा महीध्वज की आत्मा प्रेत योनि में फंसी हुई थी। धौम्य ऋषि ने अपरा एकादशी व्रत करके भगवान विष्णु से प्रार्थना की, जिसके प्रभाव से राजा को मुक्ति मिली और वह स्वर्ग लोक को प्राप्त हुआ।