आंखों में दिखें ये संकेत, हो सकता है डिमेंशिया का खतरा। जानें शुरुआती लक्षण, कारण और समय रहते डॉक्टर से मिलने की जरूरत।
डिमेंशिया एक धीरे-धीरे बढ़ने वाली बीमारी है जो इंसान की याददाश्त, सोचने-समझने की क्षमता, रोजमर्रा के काम और स्वभाव तक को प्रभावित करती है। अक्सर लोग आंखों को सिर्फ देखने के लिए इस्तेमाल करते हैं, लेकिन हाल ही में वैज्ञानिकों ने पाया है कि आंखों में होने वाले कुछ बदलाव भविष्य में डिमेंशिया का संकेत दे सकते हैं।
डिमेंशिया क्या है?
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) के अनुसार, डिमेंशिया दुनिया भर में लाखों लोगों को प्रभावित कर रहा है। अकेले अमेरिका में ही 60 लाख से ज्यादा लोग इससे जूझ रहे हैं और हर साल करीब 10 लाख लोगों की मौत डिमेंशिया से जुड़ी जटिलताओं के कारण होती है। डिमेंशिया एक अकेली बीमारी नहीं है, बल्कि कई न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर का समूह है, जिसमें सबसे आम अल्जाइमर रोग है।
आंखें कैसे दिखाती हैं डिमेंशिया का खतरा
अध्ययनों में पता चला है कि रेटिना – आंख के पीछे का हिस्सा – डिमेंशिया के शुरुआती संकेत दिखा सकता है। रेटिना रोशनी को पकड़कर मस्तिष्क तक पहुँचाता है और आंख और दिमाग के बीच पुल का काम करता है। अगर रेटिना कमजोर या पतली हो रही है, तो यह संकेत हो सकता है कि मस्तिष्क में धीरे-धीरे बदलाव शुरू हो रहे हैं।
शोध में क्या सामने आया
Frontiers in Aging Neuroscience में प्रकाशित अध्ययन में लगभग 30,000 वयस्कों पर 10 साल तक अनुसंधान किया गया। इसमें रेटिनल ऑप्टिकल कोहेरेंस टोमोग्राफी (OCT) तकनीक से जांच की गई। जिन लोगों का रेटिना पतला पाया गया, उनमें डिमेंशिया का खतरा ज्यादा था। रेटिना की मोटाई में हर यूनिट कमी के साथ डिमेंशिया का खतरा 3% बढ़ता है। जिन लोगों के रेटिना के बीच वाले हिस्से की परत पतली थी, उनमें फ्रंटोटेम्पोरल डिमेंशिया (FTD) का खतरा 41% अधिक पाया गया।
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डिमेंशिया के सामान्य लक्षण
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑन एजिंग और NHS के अनुसार, डिमेंशिया के शुरुआती लक्षण हैं:
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बार-बार चीजें भूल जाना
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सोचने-समझने की गति धीमी होना
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बातचीत में सही शब्द ढूंढने में मुश्किल
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निर्णय लेने में कठिनाई
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मूड में अचानक बदलाव, चिड़चिड़ापन
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रोजमर्रा के काम करने में परेशानी
अगर ये लक्षण लंबे समय तक बने रहें, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
क्या डिमेंशिया को रोका जा सकता है?
डिमेंशिया का पूर्ण इलाज अभी संभव नहीं है, लेकिन कुछ आदतें अपनाकर जोखिम कम किया जा सकता है:
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संतुलित और हेल्दी डाइट
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रोजाना एक्सरसाइज
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दिमाग को सक्रिय रखने वाली गतिविधियाँ
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पर्याप्त नींद
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धूम्रपान और शराब से दूरी
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नियमित आंखों और स्वास्थ्य जांच
समय रहते आंखों और शरीर के बदलाव को पहचानकर आप डिमेंशिया के खतरे को कम कर सकते हैं और मस्तिष्क की सेहत को बनाए रख सकते हैं।