हरियाणा के श्रम मंत्री अनिल विज ने भवन एवं सन्निर्माण कर्मकार बोर्ड में 1500 करोड़ के वर्कस्लिप घोटाले का खुलासा किया, जांच के लिए सीएम सैनी को पत्र लिखा।
हरियाणा के श्रम मंत्री अनिल विज ने भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड में लगभग 1500 करोड़ रुपये के वर्कस्लिप घोटाले का खुलासा किया है। प्रारंभिक जांच में 5.46 लाख वर्कस्लिप और 1.93 लाख श्रमिक पंजीकरण फर्जी पाए गए। मंत्री ने इस गंभीर अनियमितता की गहन जांच के लिए मुख्यमंत्री नायब सैनी को पत्र लिखा है।
प्रारंभिक जांच और खुलासे
अनिल विज की सतर्कता के कारण यह घोटाला सामने आया। बोर्ड की बैठकों और दस्तावेजों की समीक्षा में पता चला कि कई अपात्र लोग सरकारी योजनाओं का लाभ उठा रहे थे, जिससे सरकार को भारी वित्तीय नुकसान हुआ।
जांच के प्रमुख बिंदु:
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हिसार, कैथल, जींद, सिरसा, फरीदाबाद और भिवानी जिलों में व्यापक अनियमितताएं।
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राज्य के सभी जिला उपायुक्तों को जिला स्तरीय जांच समितियां बनाने के निर्देश।
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अगस्त 2023 से मार्च 2025 तक जारी वर्कस्लिपों का भौतिक सत्यापन।
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अवैध वर्कस्लिप और पंजीकरण
13 जिलों में कुल 5,99,758 वर्कस्लिप जारी की गईं, जिनमें से केवल 53,249 वर्कस्लिप वैध पाई गईं, जबकि 5,46,509 वर्कस्लिप अवैध पाई गईं। कुल 2,21,517 श्रमिक पंजीकरणों में से केवल 14,240 पात्र पाए गए, जबकि 1,93,756 फर्जी पंजीकरण थे।
अनिल विज ने बताया कि कई स्थानों पर पूरे गांव के फर्जी पंजीकरण कर वर्कस्लिप बनाई गईं, ताकि अपात्र लोग सरकारी योजनाओं का लाभ उठा सकें। औसतन एक श्रमिक को विभिन्न योजनाओं के माध्यम से 2.5 लाख रुपये तक का लाभ दिया जाता है, जिससे सरकार को भारी आर्थिक हानि हुई।
जांच प्रक्रिया और रोकथाम
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सत्यापन समितियां कार्यस्थल की वास्तविकता, निर्माण कार्य में सहभागिता, नियोक्ता विवरण और क्षेत्र भ्रमण के सभी पहलुओं की जांच कर रही हैं।
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जांच के दौरान नए आवेदन स्वीकार नहीं किए जा रहे हैं।
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पहले से स्वीकृत पेंशन योजनाओं को रोकने की आवश्यकता नहीं, जबकि मृत्यु, दुर्घटना और अंत्येष्टि सहायता जैसी योजनाओं का लाभ प्राथमिकता के आधार पर जारी है।