ब्लोटिंग और एसिडिटी: पेट फूलना, ब्लोटिंग और एसिडिटी में फर्क समझना जरूरी है। जानें लक्षण, कारण और सही समय पर डॉक्टर से सलाह कब लें।
ब्लोटिंग और एसिडिटी: पेट फूलना और एसिडिटी जैसी आम समस्याओं को अक्सर लोग हल्के में ले लेते हैं। लेकिन चिकित्सकों का कहना है कि लगातार ब्लोटिंग या पेट में भारीपन महसूस होना कभी-कभी गंभीर स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है।
डॉ. सुरनजीत चटर्जी, इंटरनेल मेडिसिन, अपोलो हॉस्पिटल के अनुसार, पेट फूलना सिर्फ भारी खाना या गैस की वजह से नहीं होता। यह इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS), हार्मोनल असंतुलन या मेटाबॉलिक समस्या का भी संकेत हो सकता है।
ब्लोटिंग और एसिडिटी में अंतर
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एसिडिटी: सीने में जलन, खट्टे डकार या ऊपरी पेट में दर्द।
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ब्लोटिंग: पेट में दबाव, भारीपन या सूजन महसूस होना।
डॉक्टरों का कहना है कि अक्सर दोनों समस्याएं साथ में भी दिखाई देती हैं, जिससे आम व्यक्ति भ्रमित हो जाता है।
कब हो सकती है चिंता?
अकसर त्योहारों या देर रात के खाने के बाद पेट फूलना सामान्य है। लेकिन यदि यह हर दिन या हफ्तों तक बना रहे, तो यह स्वास्थ्य के लिए चेतावनी है।
ध्यान देने योग्य संकेत:
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खाने के बाद पेट भरा-भरा लगना
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कब्ज या दस्त
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पेट दर्द और लगातार थकान
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वजन कम होना या भूख न लगना
विशेषकर शहरी जीवनशैली, तनाव और कम शारीरिक गतिविधि से फंक्शनल गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याएं बढ़ रही हैं।
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हार्मोन और थायरॉयड की भूमिका
थायरॉयड की कमी आंतों की गति धीमी कर सकती है, वहीं पीरियड्स और पेरिमेनोपॉज के दौरान हार्मोनल बदलाव से पानी रुकना और गैस बढ़ना सामान्य है। तनाव भी आंतों के बैक्टीरिया और मूवमेंट को प्रभावित करता है।
डॉक्टर की सलाह कब लें?
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ब्लोटिंग लगातार 2–3 हफ्तों से ज्यादा बनी रहे
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भूख, नींद और रोजमर्रा की गतिविधियां प्रभावित हों
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एंटासिड लेने के बावजूद राहत न मिले
आम जांच में ब्लड टेस्ट (थायरॉयड, एनीमिया), स्टूल टेस्ट, और जरूरत पड़ने पर इमेजिंग या एंडोस्कोपी शामिल हैं।
पेट फूलने से बचने के उपाय
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संतुलित आहार और फाइबर युक्त भोजन
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पर्याप्त पानी पीना
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नियमित व्यायाम
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तनाव प्रबंधन
छोटे बदलाव जीवनशैली में बड़ा अंतर ला सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बार-बार संकेत दे रहे शरीर को अनदेखा करना सबसे बड़ी गलती हो सकती है।