आम आदमी पार्टी विधायक चैतर वसावा ने गुजरात विधानसभा में आदिवासी बच्चों के कुपोषण, ग्रीन कॉरिडोर और नर्मदा पानी आपूर्ति परियोजना में भ्रष्टाचार पर सवाल उठाए। करोड़ों के कार्यक्रम और बच्चों की अनदेखी पर लगाया आरोप।
आज गांधीनगर में बजट सत्र के दूसरे दिन आम आदमी पार्टी के विसावदर के विधायक गोपाल इटालिया, डेडियापाड़ा के विधायक चैतर वसावा, जामजोधपुर के विधायक हेमंत खवा और गारियाधार के विधायक सुधीर वाघाणी विधानसभा में उपस्थित रहे और विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरने का प्रयास किया। अपने मत क्षेत्र के प्रश्नों को प्रस्तुत करने के संबंध में मीडिया से बात करते हुए चैतर वसावा ने बताया कि आज विधानसभा में उनके तारांकित प्रश्न नंबर 23 के उत्तर में सरकार द्वारा जानकारी दी गई कि नर्मदा जिले में 11,253 और दाहोद जिले में 19,594 बच्चे कुपोषण से पीड़ित हैं। उन्होंने कहा कि एक ओर “गुजरात मॉडल” और विकास की बातें की जाती हैं, जबकि दूसरी ओर आदिवासी क्षेत्रों में हजारों बच्चे कुपोषण का शिकार हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बड़े सरकारी कार्यक्रमों में नाश्ता, मंडप, स्टेज और भीड़ जुटाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन आंगनवाड़ी के बिल, गर्म नाश्ते और फलों के भुगतान के लिए ग्रांट नहीं होने का तर्क दिया जाता है। उनके अनुसार, पिछले 30 वर्षों में कुपोषण दूर करने के लिए कोई ठोस योजना या प्रभावी कार्यक्रम लागू नहीं किया गया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बच्चों के लिए आने वाली ग्रांट का उचित उपयोग नहीं होता।
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AAP विधायक चैतर वसावा ने आगे कहा कि सूरपाणेश्वर अभयारण्य क्षेत्र को स्टैच्यू ऑफ यूनिटी और सापुतारा से जोड़ने वाले ग्रीन कॉरिडोर परियोजना के संबंध में 21 गांवों की ग्राम सभाओं ने चार बार सर्वसम्मति से असहमति के प्रस्ताव पारित किए हैं। इसके बावजूद आदिवासी किसानों की जमीन बिना उचित मुआवजे के अधिग्रहित करने की प्रक्रिया जारी होने का उन्होंने आरोप लगाया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि विकास के नाम पर एक इंच भी जमीन नहीं दी जाएगी। चैतर वसावा ने प्रश्न नंबर 55 के संदर्भ में कहा कि नर्मदा से पानी आपूर्ति के लिए झरवाणी योजना पिछले तीन वर्षों से चल रही है। 54 गांवों को पानी देने का दावा करते हुए करोड़ों रुपये के बिल चुकाए गए हैं, फिर भी एक भी गांव को पानी नहीं मिला है। अभी भी जल्द पानी मिलने का दावा किया जा रहा है, लेकिन यह भ्रष्टाचार का उदाहरण है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई पानी आपूर्ति योजनाओं को कागज पर पूर्ण दिखाया जाता है, जबकि जमीन पर लोगों को उसका लाभ नहीं मिलता। सरकार से इन सभी मुद्दों पर स्पष्टता और जवाबदेही तय करने की मांग की गई है।