मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने गुजरात प्रशासनिक सुधार आयोग की छठी रिपोर्ट को स्वीकार किया, जिसमें भर्ती प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और युवा-केंद्रित बनाने के लिए 9 महत्वपूर्ण सिफारिशें की गई हैं।
गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को राज्य में लागू करने का अपना संकल्प और दृढ़ता दिखाई है। पीएम मोदी का उद्देश्य युवाओं को बेहतर अवसर और रोजगार के रास्ते खोलकर उन्हें राज्य और राष्ट्र के विकास में जोड़ना है, और मुख्यमंत्री पटेल इस दिशा में लगातार काम कर रहे हैं।
राज्य सरकार के प्रशासनिक ढांचे में सुधार के लिए मुख्यमंत्री ने डॉ. हसमुख अढिया की अध्यक्षता में गुजरात प्रशासनिक सुधार आयोग (जीएआरसी) का गठन किया था। इस आयोग ने बुधवार को गांधीनगर में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को अपनी छठी सिफारिश रिपोर्ट सौंपी, जिसमें भर्ती प्रक्रिया को अधिक कुशल, पारदर्शी और युवा केंद्रित बनाने की दिशा में कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं।
जीएआरसी की छठी रिपोर्ट की प्रमुख सिफारिशें:
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भर्ती प्रक्रिया के लिए निश्चित टाइमलाइन: रिपोर्ट में यह सुझाव दिया गया है कि भर्ती प्रक्रिया को अधिक तेज किया जाए। तीन स्टेज वाली भर्ती प्रक्रिया को 9-12 महीनों में और दो स्टेज वाली भर्ती प्रक्रिया को 6-9 महीनों में पूरा किया जाए। भविष्य में इसे और भी तेज़ करने की सिफारिश की गई है।
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संयुक्त भर्ती और कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (CET): समान शैक्षणिक योग्यता वाले विभिन्न कैडरों के लिए एक ही प्रिलिम्स और विषयवार मेन्स परीक्षा आयोजित करने का प्रस्ताव है। इससे प्रशासनिक और वित्तीय खर्च में कमी आएगी और भर्ती प्रक्रिया में तेजी आएगी।
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द्वि-वार्षिक रिक्विजिशन विंडो: रिपोर्ट में यह सुझाव दिया गया है कि प्रत्येक दो वर्ष में दो निश्चित रिक्विजिशन विंडो स्थापित की जाए। इससे सभी विभागों द्वारा ऑनलाइन मांग पत्र सबमिट करना और भर्ती नियमों की मंजूरी में तेजी आएगी।
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डिजिटल दस्तावेज़ सत्यापन (IASS): रिपोर्ट में मैनुअल दस्तावेज़ सत्यापन को खत्म करने और संपूर्ण प्रक्रिया को डिजिटल करने की सिफारिश की गई है। इससे भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और तेज़ी आएगी।
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कैंडिडेट-फ्रेंडली एंड-टू-एंड डैशबोर्ड: एक यूनिक आईडी आधारित एंड-टू-एंड डैशबोर्ड विकसित करने का सुझाव दिया गया है, जिसमें आवेदन से लेकर नियुक्ति तक की सभी प्रक्रियाओं को ट्रैक किया जा सके।
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डिजिटल वर्कफ्लो से प्रक्रिया में सुधार: सभी स्टेकहोल्डर्स (विभागों, एजेंसियों, और उम्मीदवारों) के बीच सूचना के आदान-प्रदान को एकीकृत डिजिटल पोर्टल के माध्यम से करने की सिफारिश की गई है। इससे बार-बार दस्तावेज़ जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी और प्रक्रिया अधिक सरल हो जाएगी।
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भर्ती एजेंसियों की क्षमता में वृद्धि: स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत नए मेडिकल सर्विसेज रिक्रूटमेंट बोर्ड (MSRB) की स्थापना और अन्य प्रमुख भर्ती एजेंसियों को गुजरात लोक सेवा आयोग के समक्ष स्वायत्तता देने की सिफारिश की गई है।
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कंप्यूटर-आधारित परीक्षाओं का विस्तार: राज्य में जहां तक संभव हो, सभी परीक्षाएं कंप्यूटर-आधारित (CBT) हों और हर भर्ती एजेंसी में एक एग्जाम मॉनिटरिंग यूनिट (EMU) की स्थापना की जाए।
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10 साल का भर्ती कैलेंडर: प्रत्येक विभाग के लिए अगले 10 वर्षों की भर्ती जरूरतों पर आधारित एक भर्ती कैलेंडर तैयार करने और महत्वपूर्ण सेवाओं के लिए तेजी से भर्ती करने की सिफारिश की गई है।
राज्य सरकार का दृष्टिकोण
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल का मानना है कि इन सिफारिशों को लागू करने से गुजरात के युवाओं को तेजी से रोजगार मिलेंगे और राज्य में रिक्त पदों की भरपाई भी समय पर होगी। यह सुधार प्रक्रिया न केवल भर्ती को तेज करेगी, बल्कि पारदर्शिता और एकरूपता लाकर सरकारी सेवाओं में भी सुधार होगा।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने जीएआरसी की रिपोर्ट का स्वागत करते हुए कहा कि इन सिफारिशों से राज्य में प्रशासनिक क्षमता में वृद्धि होगी और युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे। इस अवसर पर मुख्य सचिव एम.के. दास, मुख्यमंत्री के सलाहकार एस.एस. राठौड़, मुख्यमंत्री की अपर प्रधान सचिव अवंतिका सिंह, और अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे।