राजु करपड़ा पर लगे केस मामलों को लेकर खुलासा करते हुए आम आदमी पार्टी के विसावदर विधायक गोपाल इटालिया ने कहा कि राजुभाई करपड़ा ने इस्तीफा दिया है। आज उनका आभार व्यक्त करते हुए मुझे यह खेद प्रकट करना है कि जब राजुभाई आम आदमी पार्टी के साथ नहीं हैं, तो इसका दुख तो है ही। लेकिन उससे भी हजार गुना अधिक दुख आज मुझे राजुभाई का चेहरा और उनके शब्द देखकर हुआ है। मैंने राजुभाई को हमेशा अपने पास बैठकर बोलते हुए सुना है। माइक पर, मंच पर हम साथ बैठे होते थे और बोलते थे। उनके आवाज में गर्जना होती थी। उनके चेहरे पर कानूनी लड़ाई का एक जुनून और लोगों के लिए लड़ने का आक्रोश होता था। जब वे बोलते थे तो बात सुनने वालों के दिल तक पहुंचती थी। लेकिन आज जो वे बोल रहे थे, वे शब्द उनके दिल से नहीं बल्कि किसी स्क्रिप्ट से आते हुए लग रहे थे। उन शब्दों में दम नहीं था, वजन नहीं था, ताकत नहीं थी। जब वे हमारे साथ थे, आम आदमी पार्टी के साथ थे, तब उनके शब्दों में ताकत थी। आज उनके चेहरे पर वह नूर नहीं था। आज उनके चेहरे पर ग्लानि का भाव था, मानो कुछ गलत कर रहे हों, जो नहीं करना चाहिए था वही कर रहे हों।
गोपाल इटालिया ने आगे कहा कि राजुभाई ने हमारी पार्टी पर कई राजनीतिक प्रकार के आरोप लगाए। कडदा कांड को लेकर बनी घटनाओं पर भी सब कुछ कहा। लेकिन उन्होंने एक बात गुजरात की जनता से छुपाई, जिसे मैं आपके सामने रखना चाहता हूं कि राजुभाई को ऐसा कदम क्यों उठाना पड़ा? क्योंकि उनके ऊपर कुल तीन केस हैं। 2022 की विधानसभा चुनाव की एफिडेविट में उन्होंने कुल तीन केसों का उल्लेख किया था। एक केस धारा 326 का है यानी गंभीर चोट पहुंचाने का मामला। बाकी दो केस धारा 307 यानी जान से मारने की कोशिश के हैं। धारा 326 वाले केस में उन्हें 2022 चुनाव के बाद पांच साल की सजा हो चुकी है। जब सजा हुई थी तब पार्टी में चर्चा हुई थी। राजुभाई बहुत डरे हुए थे कि अब क्या होगा? तब हमने कहा था कि चिंता की जरूरत नहीं है, कोर्ट में कानूनी लड़ाई लड़ेंगे और आगे बढ़ेंगे। बाकी दो 307 के केसों में आज 12 फरवरी को सुरेंद्रनगर सेशंस कोर्ट में अंतिम दलील और अंतिम निर्णय की तारीख थी। केस नंबर 43/2018 और 44/2018। इन मामलों में राजु करपड़ा समेत पांच आरोपी थे। आज अंतिम फैसला होना था। भाजपा की ओर से उन पर दबाव डाला गया कि अगर 12 तारीख को प्रेस कॉन्फ्रेंस करके स्क्रिप्ट के अनुसार आरोप नहीं लगाए गए तो कोर्ट में कुछ भी हो सकता है। दोनों केस अलग हैं, लेकिन दोनों में एक ही दिन फाइनल सुनवाई थी। इसलिए लाचारी, मजबूरी और डर के कारण उन्होंने यह कदम उठाया।
also read: AAP का बड़ा अभियान: ‘ट्रेड डील हटाओ, किसान बचाओ’, पूरे…
AAP विधायक गोपाल इटालिया ने आगे कहा कि राजुभाई ने कहा कि पार्टी की ओर से उन्हें कानूनी सहायता नहीं मिली। जबकि सच्चाई यह है कि हाईकोर्ट टीम से ओमभाई कोटवाल, मेहुलभाई श्रीमाली, प्रणवभाई ठक्कर जुड़े थे। स्थानीय टीम से एडवोकेट विरडा साहेब और एडवोकेट पारस बावलिया जुड़े थे। सुप्रीम कोर्ट के सीनियर काउंसिल एडवोकेट रजत भारद्वाज, एडवोकेट विक्रम चौधरी, एडवोकेट विजय दलाल रूबरू और वीडियो कॉन्फ्रेंस से उपस्थित रहे। राजुभाई के सुझाव पर एडवोकेट हृदय बुच को भी नियुक्त किया गया था। इसके अलावा एडवोकेट सावन पटेल सहित कई वकील जुड़े थे। कानूनी लड़ाई में सीमाएं होती हैं। पुलिस एफिडेविट न दे तो सुनवाई रुक जाती है। सरकारी वकील अनुपस्थित रहे तो तारीख पड़ती है। जज अवकाश पर हों तो कार्यवाही रुकती है। यह बात राजुभाई जानते थे। जेल में सिर्फ राजुभाई नहीं थे, हमारे प्रदेश अध्यक्ष सहित दस नेता थे। दस में से नौ को कोई शिकायत नहीं है, सिर्फ राजुभाई को है। कारण क्या है? कारण यह है कि आज सुरेंद्रनगर कोर्ट में अंतिम दलील थी। राजुभाई और प्रवीण राम को एक ही दिन जमानत मिली। लेकिन राजुभाई को रात लगभग 10 बजे जेल से बाहर निकाला गया। प्रवीण राम अगले दिन दोपहर में बाहर आए। सामान्यतः शाम छह बजे के बाद किसी कैदी को रिहा नहीं किया जाता। तो यह विशेष व्यवस्था क्यों?
हमने राजुभाई के समर्थन में सुरेंद्रनगर, खंभालिया, तलाला, व्यारा, अंकलाव, पालनपुर, अमरेली और रामपर सहित आठ महापंचायतें कीं। पार्टी ने करोड़ों रुपये खर्च किए। स्टेज, माइक, मंडप, चाय-नाश्ता, प्रचार। अरविंद केजरीवाल ने सुरेंद्रनगर में विशाल जनसभा की। जेल में मिलने की कोशिश की लेकिन मिलने नहीं दिया गया। पूरी घटना का सार इतना ही है कि राजनीतिक कीचड़ उछालना आसान है। राजु करपड़ा ने गांधीनगर में गृह मंत्री के साथ गुप्त बैठक की थी। भाजपा का हाथ बनकर गुजरात के किसानों की आहें लेने का काम किया है। गुजरात के किसानों के मन में आशा जगी थी और ऐसे समय में राजु करपड़ा ने जो पाप किया है वह उचित नहीं है। अगर आज राजुभाई ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके AAP पर आरोप नहीं लगाए होते तो कोर्ट में उन्हें बड़ी सजा होने की संभावना थी। राजु करपड़ा जेल में किस IPS से मिले और क्या चर्चा हुई उसकी पक्की जानकारी मेरे पास है। लेकिन जेल से बचने के लिए गुजरात के करोड़ों लोगों के सपनों को तोड़ना बड़ा पाप है। मुझे राजुभाई से कोई नाराजगी नहीं है, लेकिन दुख इस बात का है कि जेल के डर से किसान आंदोलन की बलि चढ़ा दी। मेरी विनती है कि अगर केसों की कोई डील हुई हो, तो सिर्फ अपने दो केसों ही नहीं बल्कि किसान आंदोलन से जुड़े निर्दोष किसानों के केस भी वापस लेने का प्रयास करें। समय शक्तिशाली है। जो सत्य और निष्ठा के साथ चलता है, उसके साथ ईश्वर और जनता खड़ी रहती है।