जो यूजर्स कस्टमाइजेशन पसंद करते हैं, वे iPhone से निराश हो सकते हैं।
Apple के iPhones दुनियाभर में बेहद लोकप्रिय हैं। कई देशों में यूजर्स बेसब्री से इनकी नई सीरीज की रिलीज का इंतजार करते हैं। iPhone की प्रीमियम बिल्ड क्वालिटी, लंबा सॉफ्टवेयर सपोर्ट और Apple का ईकोसिस्टम इसे खास बनाते हैं। लेकिन यह सभी यूजर्स के लिए उपयुक्त नहीं है। कुछ कारणों को ध्यान में रखा जाए तो पता चलेगा कि iPhone हर किसी के लिए सही विकल्प नहीं है। आइए जानते हैं 3 प्रमुख कारण।
1. कस्टमाइजेशन की कमी
अगर आप अपने स्मार्टफोन को अपनी पसंद के अनुसार कस्टमाइज करना पसंद करते हैं, तो iPhone आपको निराश कर सकता है। Apple का iOS एक क्लोज्ड सिस्टम है, जो ज्यादातर सिर्फ Apple प्रोडक्ट्स के साथ काम करता है। इसमें थर्ड-पार्टी लॉन्चर इंस्टॉल करने या सिस्टम थीम बदलने जैसे विकल्प नहीं मिलते, जबकि एंड्रॉयड डिवाइसेज में कस्टमाइजेशन के ढेरों फीचर्स मिलते हैं।
2. सीमित बजट ऑप्शंस
हालांकि iPhone अब दुनिया का सबसे महंगा स्मार्टफोन नहीं है, लेकिन यह एक सीमित प्राइस रेंज तक ही उपलब्ध होता है। दूसरी ओर, एंड्रॉयड स्मार्टफोन हर बजट में मिल जाते हैं। 10,000 रुपये से कम कीमत में भी अच्छे एंड्रॉयड फोन्स मिल जाते हैं, जबकि iPhone सिर्फ प्रीमियम रेंज तक सीमित रहता है।
3. ओपन ईकोसिस्टम का अभाव
Apple का ईकोसिस्टम तभी बेहतर तरीके से काम करता है जब यूजर के पास बाकी डिवाइसेज भी Apple की हों। अगर आपके पास iPhone के साथ Windows लैपटॉप या Android टैबलेट है, तो चीजें सीमित हो सकती हैं। इसके विपरीत, एंड्रॉयड का ओपन ईकोसिस्टम यूजर्स को विभिन्न ब्रांड्स और डिवाइसेज के बीच बेहतर कम्पैटिबिलिटी देता है। उदाहरण के लिए, Google की सर्विसेज Windows और Android दोनों पर आसानी से काम करती हैं।