आम आदमी पार्टी के डेडियापाड़ा के विधायक चैतर वसावा ने विधानसभा में पत्रकार परिषद में अपनी बात रखते हुए कहा कि आज मेरा सवाल था कि पिछले दो वर्षों में आदिजाति विकास विभाग द्वारा “डी-साग” यानी डेवलपमेंट सपोर्ट एजेंसी ऑफ गुजरात को कितनी राशि आवंटित की गई। तो सरकार के मंत्री की ओर से जवाब मिला कि वर्ष 2024-25 में 19573.06 लाख और 2025-26 में 17009 लाख रुपये एजेंसी को आवंटित किए गए हैं। वर्ष 2024-25 में 18297.06 लाख रुपये उपयोग किए गए और 1276 लाख रुपये बिना उपयोग के पड़े हैं, जबकि वर्ष 2025-26 में 7703.43 लाख रुपये उपयोग किए गए और 9305.57 लाख रुपये बिना उपयोग के पड़े हैं।
આદિજાતિ વિકાસ માટે આવતુ બજેટ, ડેવલોપમેન્ટ સપોર્ટ એજન્સી બારોબાર પોતાના લાગતા વળગતા કોન્ટ્રાક્ટરોને એજન્સીઓને કામ આપી, કયા કામમાંથી કોને કેટલી ટકાવારી મળશે એનું બારોબાર આયોજન કરીને આદિજાતિનું બજેટ વાપરવામાં આવે છે. આદિવાસી લોકોને શું જોઈએ છે, શિક્ષણમાં શું સુવિધા જોઈએ છે, કુપોષણ… pic.twitter.com/GTf3BcFjmW
— Chaitar Vasava AAP (@Chaitar_Vasava) March 17, 2026
सरकार एक तरफ मजबूत प्रशासन की बात करती है लेकिन आदिजाति के लिए आवंटित बजट का उपयोग नहीं हो रहा है। वर्ष 2024-25 में भी 4373 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था, जिसमें से 3373 करोड़ रुपये उपयोग किए गए और उसमें भी इस एजेंसी को आदिजाति विकास विभाग द्वारा करोड़ों रुपये दिए गए हैं। वर्ष 2025-26 में भी 5120 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था, जिसमें से 2410 करोड़ रुपये उपयोग किए गए और उसमें भी सरकार ने एजेंसी को करोड़ों रुपये दिए हैं।
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विधायक चैतर वसावा ने आगे कहा कि मैं सरकार से सवाल करना चाहता हूं कि 24 जिलों में ट्राइबल सबप्लान के कार्यालय चल रहे हैं, परियोजना प्रशासक अधिकारी वहां बैठते हैं और पूरा स्टाफ आपके पास है तो इस एजेंसी को फंड आवंटित करने की क्या जरूरत है? डेवलपमेंट सपोर्ट एजेंसी अपने पसंदीदा ठेकेदारों और एजेंसियों को काम देकर, किस काम से किसे कितनी प्रतिशत मिलेगी इसका पूरा आयोजन करके आदिजाति का बजट खर्च करती है। आदिवासी लोगों को क्या चाहिए, शिक्षा में क्या सुविधाएं चाहिए, कुपोषण दूर करने के लिए क्या सुविधाएं चाहिए, आंगनवाड़ी में क्या सुविधाएं चाहिए, इसके बारे में ग्राम पंचायत, तालुका पंचायत और जिला पंचायत से नहीं पूछा जाता। सीधे गांधीनगर से एजेंसियों को बिना किसी प्रकार के टेंडर और निविदा के और बिना किसी शर्त के आदिजाति विकास विभाग का करोड़ों का बजट आवंटित कर दिया जाता है। एक तरफ सरकार नए-नए पोर्टल और टेंडरों की बात करती है लेकिन आदिजाति विकास विभाग के बजट में तो कोई टेंडर नहीं होते। तो इस तरह आदिवासी लोगों का विकास कैसे होगा। मेरी मांग है कि तत्काल प्रभाव से “डी-साग” एजेंसी को बंद किया जाए। आदिवासी लोगों का बजट उपयोग करना हो तो सीधे ग्रामसभा में प्रस्ताव लिया जाए और ग्रामसभा में जो मांगें की जाएं उन्हें मंजूर किया जाए और उन्हें तालुका स्तर तथा जिला स्तर पर लागू करके काम पूरा किया जाए, तभी आदिवासियों का विकास होगा। टेंडर और निविदा के बिना जो भी काम हुए हैं उनकी जांच की जाए और उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए तथा इस मुद्दे पर SIT का गठन किया जाए, ऐसी भी हम मांग करते हैं।