Tuesday, August 25, 2026

सीता नवमी 2026: कब है सीता नवमी? जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

by Versha
सीता नवमी 2026: कब है सीता नवमी? जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

सीता नवमी 2026 कब है? जानें 25 अप्रैल की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इस व्रत का महत्व जो धन और सौभाग्य बढ़ाने वाला माना जाता है।

साल 2026 में सीता नवमी का पावन पर्व 25 अप्रैल को मनाया जाएगा। यह दिन वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को पड़ता है और इसे जानकी जयंती के रूप में भी जाना जाता है। इस दिन माता सीता के प्राकट्य का उत्सव मनाया जाता है, जिन्हें धन, समृद्धि और सौभाग्य की देवी माना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता सीता को लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है, इसलिए इस दिन व्रत और पूजा करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन विधिपूर्वक पूजा करने से सोलह प्रकार के दान के बराबर फल मिलता है।

सीता नवमी 2026 तिथि और शुभ मुहूर्त

  • नवमी तिथि प्रारंभ: 24 अप्रैल 2026, रात 7:21 बजे
  • नवमी तिथि समाप्त: 25 अप्रैल 2026, शाम 6:27 बजे
  • मध्याह्न पूजा मुहूर्त: सुबह 10:58 बजे से दोपहर 1:34 बजे तक

सीता नवमी का धार्मिक महत्व

पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता सीता का जन्म गर्भ से नहीं हुआ था, बल्कि वे पृथ्वी से प्रकट हुई थीं। इसी कारण उन्हें “भूमि पुत्री” कहा जाता है। कहा जाता है कि राजा जनक को खेत जोतते समय एक दिव्य कन्या मिली, जिन्हें उन्होंने अपनी पुत्री के रूप में अपनाया, वही माता सीता थीं।

मान्यता है कि भगवान श्रीराम और माता सीता का संबंध एक ही नक्षत्र से जुड़ा है, इसलिए राम नवमी के बाद सीता नवमी का विशेष महत्व होता है।

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सीता नवमी पर पूजा करने के लाभ

  • घर में सुख-समृद्धि और धन-धान्य की वृद्धि होती है
  • दांपत्य जीवन में मधुरता और स्थिरता आती है
  • पति की लंबी आयु और वैवाहिक सुख की प्राप्ति होती है
  • जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और शांति का संचार होता है

सीता नवमी पूजा विधि

इस दिन माता सीता और भगवान राम की विधिपूर्वक पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

  • सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लें
  • पूजा स्थल पर भगवान राम और माता सीता की प्रतिमा स्थापित करें
  • दीप, धूप, फूल और नैवेद्य अर्पित करें
  • रामचरितमानस या सुंदरकांड का पाठ करें
  • पृथ्वी, खेत और हल की पूजा करना भी शुभ माना जाता है
  • जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और जल का दान करें
  • विवाहित महिलाएं सुहाग सामग्री अर्पित कर अखंड सौभाग्य की कामना करें
  • कन्याओं और गरीबों को भोजन कराना पुण्यदायी माना जाता है

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