सावन शिवरात्रि 2026 कब है? जानें सावन शिवरात्रि की तिथि, जलाभिषेक मुहूर्त, चार प्रहर पूजा समय, भोग और भगवान शिव की पूजा सामग्री।
सावन शिवरात्रि 2026: सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र महीनों में से एक माना जाता है। इस महीने में आने वाली सावन शिवरात्रि का विशेष धार्मिक महत्व होता है। साल 2026 में सावन शिवरात्रि 11 अगस्त 2026 को मनाई जाएगी। इस दिन शिव भक्त भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं और रात में चार प्रहर की पूजा करते हैं।
सावन महीने की शुरुआत 30 जुलाई 2026 से होगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रावण मास में भगवान शिव की पूजा और साधना करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है।
सावन शिवरात्रि 2026 की तिथि
पंचांग के अनुसार, सावन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 11 अगस्त 2026 को सुबह 4 बजकर 54 मिनट से शुरू होगी, जो 12 अगस्त 2026 को सुबह 1 बजकर 52 मिनट पर समाप्त होगी।
इसी दिन कांवड़िए भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। सावन शिवरात्रि के साथ ही कई स्थानों पर कांवड़ यात्रा का समापन भी होता है।
सावन शिवरात्रि पर जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त
निशिता काल पूजा मुहूर्त: 12 अगस्त को रात 12:05 बजे से 12:48 बजे तक
सावन शिवरात्रि 2026 चार प्रहर पूजा मुहूर्त
प्रथम प्रहर पूजा: शाम 7:04 बजे से रात 9:45 बजे तक
द्वितीय प्रहर पूजा: रात 9:45 बजे से देर रात 12:26 बजे तक
तृतीय प्रहर पूजा: देर रात 12:26 बजे से सुबह 3:07 बजे तक
चतुर्थ प्रहर पूजा: सुबह 3:07 बजे से सुबह 5:49 बजे तक
धार्मिक मान्यता के अनुसार, सावन शिवरात्रि की रात भगवान शिव की पूजा और मंत्र जाप करने से विशेष फल प्राप्त होता है।
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सावन महीने का धार्मिक महत्व
पुराणों में सावन महीने को भगवान शिव का प्रिय महीना बताया गया है। मान्यता है कि इस महीने में की गई शिव आराधना व्यक्ति को कष्टों से मुक्ति दिलाने में सहायक होती है।
धार्मिक ग्रंथों में भगवान शिव के प्रिय महीनों में श्रावण का विशेष स्थान बताया गया है। सावन में भगवान शिव की पूजा, व्रत और ध्यान करने से भक्तों को आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होने की मान्यता है।
सावन शिवरात्रि पर भगवान शिव को अर्पित करें ये चीजें
दूध और गंगाजल: शिवलिंग पर दूध और गंगाजल चढ़ाना शुभ माना जाता है। इससे मन और शरीर की शुद्धि की मान्यता है।
शहद: रुद्राभिषेक में शहद का प्रयोग किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इससे जीवन में मधुरता आती है।
अक्षत (चावल): बिना टूटे हुए सफेद चावल शिव पूजा में विशेष महत्व रखते हैं।
बिल्व पत्र: भगवान शिव को बिल्व पत्र अत्यंत प्रिय माने जाते हैं। पूजा में तीन पत्तियों वाला बिल्व पत्र अर्पित करना शुभ माना जाता है।
सफेद फूल: शिव पूजा में सफेद रंग के फूल जैसे आक और कनेर के फूल अर्पित किए जाते हैं।
घी और दही: पंचामृत और रुद्राभिषेक में घी और दही का उपयोग किया जाता है।
फल, सूखे मेवे और गुड़: नारियल, किशमिश, खजूर और गुड़ से बने प्रसाद भगवान शिव को अर्पित किए जाते हैं।
पंचामृत: दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से तैयार पंचामृत शिव पूजा में विशेष महत्व रखता है।
सावन शिवरात्रि 2026 भोग सूची
सावन शिवरात्रि पर भगवान शिव को कई प्रकार के भोग लगाए जाते हैं। इनमें शामिल हैं:
- खीर
- हलवा
- बेल का फल
- फलों का रस
- मालपुआ
- गन्ने का रस
- भांग
- धतूरा
सावन शिवरात्रि भगवान शिव की भक्ति और आराधना का विशेष पर्व है। इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने से भक्त भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने की कामना करते हैं।