Sunday, May 10, 2026

अरविंद केजरीवाल-स्टाइल बयान: “न्यायालय की कार्यवाही में आगे भाग लेना संभव नहीं,” गांधीवादी सत्याग्रह का हवाला

by Neha
अरविंद केजरीवाल-स्टाइल बयान: “न्यायालय की कार्यवाही में आगे भाग लेना संभव नहीं,” गांधीवादी सत्याग्रह का हवाला

गांधीवादी सत्याग्रह का हवाला देते हुए एक व्यक्ति ने अदालत की कार्यवाही में आगे भाग लेने से इनकार किया और न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए।

एक व्यक्ति ने न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा को संबोधित एक पत्र में स्पष्ट किया है कि वह अब अदालत में चल रही कार्यवाही में न तो स्वयं और न ही किसी वकील के माध्यम से आगे भाग ले पाएगा। उसने अपने इस निर्णय को महात्मा गांधी के सत्याग्रह के सिद्धांतों से प्रेरित बताया है।

पत्र में कहा गया है कि संबंधित न्यायिक प्रक्रिया उसकी समझ के अनुसार उस मूलभूत सिद्धांत के अनुरूप नहीं है, जिसके तहत यह माना जाता है कि “न्याय न केवल होना चाहिए, बल्कि उसे होते हुए दिखना भी चाहिए।”

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पत्र लेखक ने यह भी स्पष्ट किया कि यह निर्णय भावनात्मक या तात्कालिक प्रतिक्रिया नहीं है, बल्कि गहन विचार-विमर्श के बाद लिया गया है। उसके अनुसार, मौजूदा परिस्थितियों में अदालत में उपस्थित रहकर या कानूनी प्रतिनिधित्व के माध्यम से कार्यवाही में भाग लेना किसी सार्थक परिणाम तक नहीं पहुंचाएगा।

गांधीवादी विचारधारा का उल्लेख करते हुए पत्र में कहा गया है कि यह कदम किसी टकराव या विरोध के रूप में नहीं, बल्कि नैतिक और वैचारिक असहमति के आधार पर लिया गया है।

इस घटनाक्रम ने एक बार फिर उन मामलों पर चर्चा छेड़ दी है, जहां पक्षकार न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाते हुए अपनी भागीदारी से पीछे हटने का निर्णय लेते हैं।

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