पंजाब के ऊर्जा मंत्री संजीव अरोड़ा ने राज्य में चल रहे बिजली संकट के बीच बड़ा बयान देते हुए आश्वासन दिया है कि 1 मई से प्रदेश में बिजली कटौती नहीं होगी। उन्होंने कहा कि हालिया समस्या अस्थायी है और सरकार हालात को नियंत्रित करने में पूरी तरह सक्षम है।
चंडीगढ़ में प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी जानकारी
चंडीगढ़ में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान मंत्री ने स्वीकार किया कि 18 अप्रैल से राज्य में अनियोजित बिजली कटौती देखने को मिली है। उन्होंने बताया कि यह स्थिति अप्रत्याशित थी और पूरे उत्तर भारत में बढ़ती गर्मी के कारण इसी तरह की समस्या सामने आई है।
अचानक बढ़ी गर्मी से बिगड़ा संतुलन
ऊर्जा मंत्री ने कहा कि आमतौर पर मई और जून में बिजली की मांग बढ़ती है, जिसके लिए सरकार पहले से तैयारी करती है। लेकिन इस बार तापमान में अचानक वृद्धि होने के कारण बिजली की मांग समय से पहले ही बढ़ गई, जिससे आपूर्ति पर दबाव पड़ा। उन्होंने यह भी बताया कि बिजली संकट मुख्य रूप से शाम 6 बजे के बाद ज्यादा देखने को मिला है, जब खपत अपने चरम पर होती है।
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सरकार की तैयारी और सुधार के दावे
अरोड़ा ने दावा किया कि पिछले कुछ दिनों में स्थिति में सुधार देखा गया है और उपभोक्ताओं को राहत मिलनी शुरू हो गई है। उन्होंने दोहराया कि राज्य सरकार का मुफ्त बिजली देने का वादा पूरी तरह कायम है और इसे हर हाल में पूरा किया जाएगा।
विभाग के अनुसार, लगभग 6,000 करोड़ रुपये की लागत से राज्य में ट्रांसमिशन और वितरण व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है, हालांकि बढ़ी हुई मांग ने इस प्रक्रिया को भी प्रभावित किया है।
उद्योगों के लिए विशेष व्यवस्था
बिजली भार को संतुलित करने के लिए सरकार ने ओपन एक्सेस नीति के तहत उद्योगों को रात के समय सीधे बिजली खरीदने की अनुमति दी है। इसका उद्देश्य दिन के समय ग्रिड पर दबाव कम करना और घरेलू उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली उपलब्ध कराना है।
उपभोक्ताओं से अपील
ऊर्जा विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे पीक आवर्स में अनावश्यक बिजली उपकरणों का उपयोग कम करें ताकि सप्लाई पर दबाव न पड़े और सभी क्षेत्रों में सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।