Monday, August 10, 2026

विश्व आदिवासी दिवस पर संजय सिंह का BJP सरकार पर हमला, आदिवासी जमीन और PESA कानून को लेकर उठाए सवाल

by Neha
विश्व आदिवासी दिवस पर संजय सिंह का BJP सरकार पर हमला, आदिवासी जमीन और PESA कानून को लेकर उठाए सवाल

विश्व आदिवासी दिवस पर संजय सिंह ने छत्तीसगढ़ की BJP सरकार पर आदिवासी जमीन, जंगल और PESA कानून को लेकर गंभीर आरोप लगाए और प्रतिनिधित्व पर सवाल उठाए।

विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आयोजित एक विशाल कार्यक्रम में आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता संजय सिंह ने छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार पर आदिवासी हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने आदिवासी समुदाय की जमीन, जंगल और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए।

संजय सिंह ने आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ में आदिवासियों की हजारों एकड़ जमीन और बड़ी संख्या में पेड़ों पर जबरन कब्जे की स्थिति पैदा की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि राज्य में आदिवासी समुदाय के अधिकारों की रक्षा के लिए बनाए गए PESA कानून का भी कथित तौर पर उल्लंघन हो रहा है।

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मोदी-अडानी को लेकर संजय सिंह का आरोप

AAP नेता ने अपने संबोधन में केंद्र और छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार पर उद्योगपति अडानी समूह के हितों को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में जमीन और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े फैसलों में स्थानीय समुदाय की सहमति और अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए।

संजय सिंह ने आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार पर मोदी और अडानी का प्रभाव है और इसका असर आदिवासी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के अधिकारों पर पड़ रहा है। हालांकि, इन राजनीतिक आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं की गई है।

PESA कानून के उल्लंघन का लगाया आरोप

संजय सिंह ने PESA यानी पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम का मुद्दा उठाते हुए कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं के अधिकारों और स्थानीय समुदाय की भागीदारी को मजबूत करना जरूरी है।

उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासी क्षेत्रों में विकास और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े फैसलों में ग्राम सभाओं की भूमिका को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने सरकार से आदिवासी समुदाय के संवैधानिक और कानूनी अधिकारों को सुनिश्चित करने की मांग की।

आदिवासी प्रतिनिधित्व को लेकर भी सवाल

विश्व आदिवासी दिवस के मंच से संजय सिंह ने देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने दावा किया कि अब तक भारत रत्न से सम्मानित 53 लोगों में आदिवासी समाज का कोई व्यक्ति शामिल नहीं है।

उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय ने देश के सामाजिक, सांस्कृतिक और स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। ऐसे में राष्ट्रीय स्तर पर आदिवासी समाज के योगदान और प्रतिनिधित्व को उचित सम्मान मिलना चाहिए।

आदिवासी अधिकारों की रक्षा की मांग

संजय सिंह ने आदिवासी समुदाय की जमीन, जंगल और प्राकृतिक संसाधनों पर उनके अधिकारों को सुरक्षित रखने की मांग की। उन्होंने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में किसी भी परियोजना या विकास कार्य के दौरान स्थानीय लोगों की भागीदारी और उनके कानूनी अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए।

विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर दिए गए उनके बयान में आदिवासी अधिकार, PESA कानून, भूमि संरक्षण और राजनीतिक प्रतिनिधित्व प्रमुख मुद्दे रहे। संजय सिंह ने केंद्र और राज्य सरकार से आदिवासी समुदाय से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की।

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