AAP नेता संजय सिंह ने चुनाव प्रक्रिया और केंद्रीय संस्थाओं के उपयोग को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने लोकतंत्र और तानाशाही पर टिप्पणी करते हुए राजनीतिक बहस को तेज कर दिया।
आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने एक बयान में देश की चुनावी व्यवस्था और संस्थागत भूमिका को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान विभिन्न केंद्रीय एजेंसियों और व्यवस्थाओं का व्यापक स्तर पर उपयोग किया जा रहा है, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित होने की बात कही गई।
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संस्थाओं के इस्तेमाल पर जताई आपत्ति
संजय सिंह ने अपने बयान में ED, CBI और चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं की भूमिका पर सवाल खड़े किए। उन्होंने दावा किया कि चुनावों में बड़ी संख्या में केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती और भारी खर्च के साथ-साथ प्रशासनिक अधिकारियों में बदलाव जैसी स्थितियां भी देखने को मिलती हैं, जिन पर उन्होंने चिंता जताई।
ED, CBI, चुनाव आयोग, ढाई लाख केंद्रीय सुरक्षा बल, चुनाव में हज़ारों करोड़ खर्च करना, DGP CS DM SP को हटाना, SIR के जरिये 27 लाख मतदाताओं को मताधिकार से वंचित रखना।
फिर TMC को हराकर मोदी और गोदी मीडिया द्वारा ढोल पीटना।
अगर ये लोकशाही है तो फिर तानाशाही क्या है? pic.twitter.com/hzstJIcDB7— Sanjay Singh AAP (@SanjayAzadSln) May 4, 2026
मतदाता अधिकारों को लेकर आरोप
AAP नेता ने यह भी आरोप लगाया कि मतदाता सूची में संशोधन जैसी प्रक्रियाओं के चलते बड़ी संख्या में मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि इससे लोकतांत्रिक भागीदारी पर असर पड़ता है, हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।
लोकतंत्र और तानाशाही पर बहस
संजय सिंह ने अपने बयान में मौजूदा राजनीतिक हालात को लेकर लोकतंत्र और तानाशाही की तुलना करते हुए सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि इस तरह की परिस्थितियां लोकतांत्रिक व्यवस्था में सामान्य मानी जाती हैं, तो फिर वास्तविक लोकतंत्र की परिभाषा पर पुनर्विचार की जरूरत है।