राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने भारतीय परिवहन मजदूर संघ के 26वें त्रैवार्षिक अधिवेशन का उद्घाटन किया, संगठन को स्वहित के साथ समाज और राष्ट्रहित का ध्यान रखने की दी सलाह

by Neha
राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने भारतीय परिवहन मजदूर संघ के 26वें त्रैवार्षिक अधिवेशन का उद्घाटन किया, संगठन को स्वहित के साथ समाज और राष्ट्रहित का ध्यान रखने की दी सलाह

राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने बीकानेर में भारतीय परिवहन मजदूर संघ के 26वें त्रैवार्षिक अधिवेशन का उद्घाटन किया और संगठन को स्वहित के साथ समाज और राष्ट्रहित का ध्यान रखने की सलाह दी।

राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने शनिवार को बीकानेर के गंगाशहर स्थित आदर्श विद्या मंदिर में भारतीय परिवहन मजदूर संघ के 26वें त्रैवार्षिक अखिल भारतीय अधिवेशन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने संगठन से जुड़े मजदूरों को स्वहित के साथ-साथ समाज और राष्ट्रहित के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने की सलाह दी।

राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने अपने उद्घाटन भाषण में कहा कि पिछले बारह वर्षों में भारत ने आर्थिक दृष्टि से बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं और आज हम दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुके हैं। उन्होंने इस सफलता में श्रमिकों और मजदूरों के योगदान को महत्वपूर्ण बताया।

राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने भारतीय मजदूर संघ के संस्थापक श्री दत्तोपंत ठेंगड़ी के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने 23 जुलाई 1955 को भारतीय मजदूर संघ की स्थापना कर देशभर के मजदूरों को एकजुट किया। उन्होंने यह भी कहा कि ठेंगड़ी जी का मानना था कि मजदूरों का आचार, विचार और सभ्यता पूरी दुनिया को एक कर सकती है, और देश के विकास के लिए स्वदेशी प्रोत्साहन महत्वपूर्ण है।

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राज्यपाल ने संगठन के सदस्यों से अपील की कि वे सिर्फ स्वहित के बजाय समाज और राष्ट्रहित पर भी ध्यान केंद्रित करें। उन्होंने कहा, “हम सभी को अपने अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों को भी समझना चाहिए।” साथ ही, उन्होंने मजदूरों को देश के विकास की धुरी बताते हुए भारतीय मजदूर संघ के सिद्धांतों को अनुसरण करने का आह्वान किया।

राज्यपाल ने राजस्थान की सांस्कृतिक धरोहर और वीरता का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह राज्य वीरों और संतों की भूमि है, जहां बप्पा रावल और महाराणा प्रताप जैसे महान योद्धा हुए हैं। इसके अलावा, उन्होंने राजस्थान की भौगोलिक विविधता, जनजातीय क्षेत्रों और यहां की विशेष परंपराओं का भी जिक्र किया।

अधिवेशन के शुभारंभ से पहले राज्यपाल ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की।

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