मुख्यमंत्री भजनलाल का अनोखा नवरात्रि कदम – 8 महीने से अन्न त्याग, तप, अनुशासन और सेवा का संगम

by Neha
मुख्यमंत्री भजनलाल का अनोखा नवरात्रि कदम - 8 महीने से अन्न त्याग, तप, अनुशासन और सेवा का संगम

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 8 महीने से अन्न त्यागकर नवरात्रि में तप, साधना और सेवा का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है।

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इस नवरात्रि को एक साधना‑यात्रा में बदला है। वे पिछले आठ महीनों से अन्न का त्याग कर चुके हैं और इस पावन पर्व में उनका उपवास, तप और सेवा का अनूठा संतुलन सबका ध्यान खींच रहा है।

आध्यात्मिक साधना का समर्थन

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के लिए यह नवरात्रि सिर्फ धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि आत्मानुशासन, तपस्या और आंतरिक शुद्धि का अवसर भी है। वे केवल नींबू पानी, नारियल पानी, फलाहार, उबली सब्जियाँ, कभी‑कभी चाय या गाय का दूध ग्रहण करते हैं। उनका कहना है कि यह साधना उन्हें माँ दुर्गा की कृपा से संभव हो पाई, जिससे उन्हें आत्मबल और ध्यान की शक्ति मिली है।

मंदिर दर्शन और भक्ति

भजनलाल शर्मा ने उदयपुर के प्रसिद्ध त्रिपुरा सुंदरी मंदिर में पूजा-अर्चना की और जैसलमेर स्थित तनोट माता मंदिर में भी शक्ति की आराधना की। इन प्रतिष्ठित धार्मिक स्थलों पर उनकी भक्ति की झलक सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, जो उनके आध्यात्मिक व्यक्तित्व को उजागर करती है।

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संयम, कार्यकुशलता और सक्रियता

नवरात्रि के नौ दिनों में भी मुख्यमंत्री ने निरंतर सक्रिय बने रहने का उदाहरण पेश किया। उन्होंने 42 से अधिक सरकारी कार्यक्रमों में भाग लिया, उद्घाटन, निरीक्षण और शिलान्यास कार्य किए। राजस्थान की राजधानी जयपुर से बाहर लगभग 18 बार दौरे पर गए। यह विशेष है कि उपवास और संयम के बावजूद उनकी कार्यकुशलता में कोई कमी नहीं आई — उनकी दिनचर्या में योग, ध्यान और वॉक शामिल थे, जो उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से सुदृढ़ रखे।

भक्ति, तपस्या और लोक सेवा का संतुलन

मुख्यमंत्री भजनलाल के मुताबिक, संयम उनका सबसे बड़ा “शस्त्र” है। उनका उपवास केवल भूख झेलने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि आत्मिक साधना और जनसेवा का माध्यम है। उन्होंने यह साबित किया है कि राजनीति और आध्यात्मिकता एक साथ चल सकती हैं। उनकी यह साधना प्रदेश की जनता को प्रेरित कर रही है कि लोककल्याण और आस्था का संयोजन संभव है।

साधना से प्रेरणा, भविष्य की राह

भजनलाल शर्मा की यह तपस्या नवरात्रि के अवसर पर और भी विशेष हो जाती है। माँ दुर्गा की कृपा से प्रेरित उनकी आस्था उन्हें एक ऊँचे आध्यात्मिक पथ पर ले गई है। उनका यह संदेश है कि एक जननेता के लिए भक्ति, सेवा और संकल्प एक साथ संभव हैं। राजस्थान के इस नेता का यह कदम प्रदेश की जनता को न सिर्फ प्रेरणा देता है, बल्कि एक नया आदर्श स्थापित करता है कि राजनीति में भी साधना की शक्ति हो सकती है।

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