पंजाब विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवान ने पंथिक मर्यादा की रक्षा के लिए संगतों को एकजुट होने का आह्वान किया और एसजीपीसी में पारदर्शिता व जवाबदेही की मांग की।
पंजाब विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवान ने गुरुवार को संगत और सिख पंथिक समुदायों से पंथिक मर्यादा की रक्षा के लिए एकजुट होने का आह्वान किया। उन्होंने एसजीपीसी (सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी) में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि पंथिक संस्थानों और गुरुओं के गोलकों का राजनीतिक स्वार्थ के लिए दुरुपयोग अस्वीकार्य है।
संधवान ने कहा कि सिख धर्म के प्रबंधन संस्थान एसजीपीसी वर्षों से सवालों के घेरे में रहा है। उन्होंने कहा, “पंथिक समुदायों की आवाज़ समय-समय पर उठती रही है। हाल ही में ज्ञानी रघुबीर सिंह और भाई रणजीत सिंह के खुलासों ने इन मुद्दों को और भी गंभीर रूप में सामने रखा है। गुरुद्वारों की भूमि, गोलक और प्रबंधन में अनियमितताएं लगातार देखी जा रही हैं, लेकिन सुधार की बजाय शिकायत करने वालों पर कार्रवाई की जाती रही।”
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उन्होंने विशेष रूप से कहा, “तबादलों, निष्कासनों और मुकदमों का इस्तेमाल मुखबिरों को चुप कराने के लिए किया जा रहा है। ऐसे में पंथ और इसके संस्थानों का राजनीतिक उपयोग करना पूरी तरह अस्वीकार्य है। भूमि घोटाले, लंगर रोटियों से संबंधित अनियमितताएं और 328 स्वरूपों के संवेदनशील मामले अब और नहीं टाले जा सकते।”
संधवान ने वर्तमान स्थिति को निर्णायक क्षण बताते हुए संगतों और पंथिक समुदायों से अपील की कि वे सरबत खालसा की भावना से एकजुट हों। उन्होंने कहा, “यदि पंथ कमजोर होगा, तो समाज कमजोर होगा। गुरुघरों की मर्यादा और संपत्ति की रक्षा के लिए जागरूकता और सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। यह समय पंथिक मर्यादा और संस्थानों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने का है।”
संधवान का यह आह्वान पंथिक संस्थानों में पारदर्शिता, जवाबदेही और राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत है।