मान सरकार की सशक्त पहल: पंजाब ने स्कूलों में नशीली दवाओं के खिलाफ अग्रिम पंक्ति कर दी तैयार

by Neha
मान सरकार की सशक्त पहल: पंजाब ने स्कूलों में नशीली दवाओं के खिलाफ अग्रिम पंक्ति कर दी तैयार

पंजाब सरकार ने स्कूलों में नशीली दवाओं के खिलाफ ‘युद्ध नशीएं विरुद्ध’ अभियान शुरू किया। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में प्रधानाध्यापकों को प्रशिक्षित कर किशोर मानसिक स्वास्थ्य और व्यसन रोकथाम को सशक्त बनाया जा रहा है।

देश के अधिकांश हिस्सों में नशीली दवाओं की समस्या तब ही चर्चा में आती है जब इसका असर सड़क स्तर तक दिखने लगता है, लेकिन पंजाब सरकार ने मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में इस संकट से निपटने के लिए अग्रिम और दूरदर्शी रणनीति अपनाई है। राज्य ने स्कूलों को नशीली दवाओं के दुरुपयोग की रोकथाम का केंद्र बनाया और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षा को प्राथमिकता दी।

स्कूलों में ‘युद्ध नशीएं विरुद्ध’ अभियान

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, शिक्षा विभाग और मोहाली के डॉ. बी.आर. अंबेडकर आयुर्वेद संस्थान (AIMS) के सहयोग से, राज्य सरकार ने प्रधानाध्यापकों के लिए संरचित प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यशालाएं आयोजित की हैं। इसका उद्देश्य है कि विद्यालय नेतृत्व नशीले पदार्थों के सेवन और मानसिक स्वास्थ्य चुनौतियों का सक्रिय रूप से मुकाबला कर सके।

इस पहल का मूल विचार यह है कि मानसिक स्वास्थ्य सिर्फ व्यक्तिगत नहीं बल्कि शैक्षणिक, सामाजिक और भावनात्मक विकास का आधार है। अध्ययन बताते हैं कि लगभग आधे मानसिक स्वास्थ्य मामलों की शुरुआत 14 साल की उम्र से पहले होती है। इसीलिए पंजाब सरकार ने प्रधानाध्यापकों को प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली के रूप में सशक्त बनाया है।

प्रधानाध्यापकों को बनाए गए सशक्त

विद्यालय प्रमुख अब छात्रों के व्यवहार में बदलाव और समस्याओं के शुरुआती संकेतों की पहचान कर, सुरक्षित और कलंक-मुक्त सहायता प्रणाली प्रदान कर सकते हैं। सरकार ने प्रधानाध्यापकों को व्यसन रोकने, रेफरल प्रक्रिया तैयार करने और छात्र कल्याण केंद्र बनाने के लिए व्यावहारिक उपकरण उपलब्ध कराए हैं। इस कदम से स्कूल अब केवल पर्यवेक्षक नहीं बल्कि सशक्त संस्थान बन गए हैं।

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व्यापक प्रशिक्षण और जिलावार योजना

‘युद्ध नशीएं विरुद्ध’ के दूसरे चरण में पंजाब के 23 जिलों के 6,000 से अधिक स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को प्रशिक्षित किया जाएगा। पहले चरण में नौ जिलों के 1,463 प्रधानाचार्यों को शामिल किया गया, जिनके प्रशिक्षण 7 से 9 जनवरी 2026 को आयोजित हुए। सीमावर्ती जिलों पर विशेष ध्यान दिया गया, जो नशा नियंत्रण में अग्रिम पंक्ति की भूमिका निभाते हैं।

डेटा-आधारित और स्थायी पहल

यह पहल केवल प्रतीकात्मक नहीं है। इसे पंजाब डेटा इंटेलिजेंस एंड टेक्निकल सपोर्ट यूनिट (DITSU) के आंकड़ों द्वारा समर्थित किया गया है और राष्ट्रीय नशाखोरी निवारण योजना (NAPDDR) के तहत जिला नोडल अधिकारियों के माध्यम से समन्वित किया जाता है। यह सुनिश्चित करता है कि कार्यक्रम परिणाम-उन्मुख और स्थायी प्रभाव वाला हो।

नेतृत्व और समर्थन

मोहाली प्रशिक्षण केंद्र में शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस और दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की उपस्थिति इस पहल को दी गई प्राथमिकता को दर्शाती है। यह मॉडल दर्शाता है कि मानसिक स्वास्थ्य, शिक्षा और नशा मुक्ति को एकीकृत दृष्टिकोण से हल किया जा सकता है।

पंजाब का उदाहरण

पंजाब ने यह साबित किया है कि स्कूल स्तर पर सशक्त नेतृत्व, मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता और डेटा-आधारित रणनीतियों के माध्यम से नशीली दवाओं के दुरुपयोग को जड़ से रोकना संभव है। यह पहल केवल नशा रोकने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बच्चों, स्कूलों और राज्य के भविष्य में दीर्घकालिक निवेश का प्रतीक है।

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