प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 अप्रैल को महिला सम्मेलन को करेंगे संबोधित, महिला आरक्षण विधेयक पर देंगे दिशा-निर्देश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 अप्रैल को महिला सम्मेलन को करेंगे संबोधित, महिला आरक्षण विधेयक पर देंगे दिशा-निर्देश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 अप्रैल को महिला सम्मेलन को संबोधित करेंगे। महिला आरक्षण विधेयक और नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन पर जोर देकर महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने की योजना।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 अप्रैल को विज्ञान भवन में आयोजित एक बड़े महिला सम्मेलन को संबोधित करेंगे। यह सम्मेलन संसद के विशेष सत्र से पहले आयोजित किया जा रहा है और महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को बढ़ाने की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को उजागर करने वाला महत्वपूर्ण जनसंपर्क प्रयास माना जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी अपने संबोधन में विधायी निकायों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में उनकी अधिक सक्रिय भूमिका सुनिश्चित करने पर जोर दे सकते हैं। सम्मेलन में सभी वर्तमान महिला सांसदों को आमंत्रित किया गया है।

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महिला आरक्षण विधेयक: संसद में एक महत्वपूर्ण कदम

महिला आरक्षण विधेयक पर विचार-विमर्श के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाया गया है। यह कदम महिलाओं के लिए अधिक सीटें सुनिश्चित करने और लैंगिक समानता को बढ़ावा देने की दिशा में ऐतिहासिक माना जा रहा है। सरकार 16 अप्रैल को नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन पेश करने की तैयारी कर रही है, जिससे लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिला आरक्षण के प्रावधान और अधिक प्रभावी ढंग से लागू किए जा सकें।

जनता से संवाद और महिला सशक्तिकरण

भारतीय जनता पार्टी ने संसद में विधेयक प्रस्तुत होने से पहले “महिला संवाद” जैसी पहलों के माध्यम से देशभर में महिलाओं से सीधे संपर्क स्थापित किया है। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण और शहरी महिलाओं को कानून और उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना और जमीनी स्तर से प्रतिक्रिया प्राप्त करना है।

प्रधानमंत्री मोदी ने महिला आरक्षण विधेयक को देश के लोकतांत्रिक ढांचे में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक न केवल नारी शक्ति के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दर्शाता है बल्कि नीति निर्माण में महिलाओं को सशक्त और प्रभावी आवाज देने में मदद करेगा।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि विधानसभाओं में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ने से अधिक समावेशी, संतुलित और जवाबदेह शासन व्यवस्था स्थापित होगी।

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