प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुतिन को रूस में अनूदित भगवद्गीता भेंट की। 2011 में विवादित रही गीता आज भारत-रूस संबंधों और ऐतिहासिक मित्रता का प्रतीक बन गई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को अपने हालिया भारत दौरे के दौरान रूसी भाषा में अनूदित भगवद्गीता भेंट की। इस उपहार का खास महत्व इसलिए है क्योंकि 2011 में रूस में इसी गीता के रूसी अनुवाद को लेकर विवाद हुआ था और उसे ‘एक्सट्रीमिस्ट’ करार देने की कोशिश की गई थी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पुतिन की बैठक
रूसी राष्ट्रपति पुतिन 2 दिन के भारत दौरे पर हैं। 4 दिसंबर 2025 की रात पीएम मोदी ने उन्हें डिनर पर आमंत्रित किया। इससे पहले दोनों नेता एयरपोर्ट से कार में सवार होकर पीएम आवास पहुंचे। वहां पीएम मोदी और पुतिन के बीच लगभग 2 घंटे 30 मिनट तक बैठक हुई, जिसमें कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा की गई।
also read: Putin India Visit: पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के…
2011 का विवाद और भगवद्गीता का महत्व
करीब पंद्रह साल पहले साइबेरिया के टॉम्स्क शहर में इस्कॉन द्वारा प्रकाशित “भगवद्गीता ऐज इट इज” के रूसी अनुवाद को लेकर विवाद हुआ था। स्थानीय अधिकारियों ने इसे उग्रवादी साहित्य करार देने की कोशिश की थी और प्रस्ताव रखा गया था कि इसे रूस की एक्सट्रीमिस्ट बुक लिस्ट में शामिल किया जाए।
गिफ्ट में बदल गई कहानी
आज वही भगवद्गीता भारत-रूस रिश्तों का प्रतीक बन गई है। पीएम मोदी द्वारा पुतिन को भेंट की गई यह गीता सिर्फ एक पुस्तक नहीं है, बल्कि यह दोनों देशों के बीच मजबूत विश्वास और ऐतिहासिक मित्रता का प्रतीक है। इस उपहार ने यह संदेश दिया कि बीते विवादों को पीछे छोड़कर भारत और रूस अब नई साझेदारी और सहयोग की ओर बढ़ रहे हैं।
भारत-रूस संबंधों में नया अध्याय
इस भेंट ने यह भी दिखाया कि दोनों देशों के संबंध सिर्फ कूटनीतिक साझेदारी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि व्यक्तिगत और आध्यात्मिक स्तर पर भी गहरे और मजबूत हैं। भगवद्गीता जैसे ग्रंथ का होना इस मित्रता को और भी अर्थपूर्ण बनाता है।