40 साल बाद भारत सरकार ने ऑपरेशन पवन में शहीद हुए आईपीकेएफ जवानों को श्रद्धांजलि दी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उनके साहस और बलिदान को मान्यता दी और शांति सैनिकों के योगदान को याद किया।
वेटरन्स डे 2026 के अवसर पर भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने श्रीलंका में लिबरेशन टाइगर ऑफ तमिल ईलम (LTTE) के खिलाफ लड़े गए इंडियन पीस कीपिंग फोर्स (IPKF) के सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। करीब 40 साल बाद भारत सरकार ने ऑपरेशन पवन (1987-1990) में वीरगति प्राप्त हुए भारतीय सैनिकों के योगदान को मान्यता दी।
राजनाथ सिंह ने दिल्ली में वेटरन्स डे के कार्यक्रम में कहा कि तत्कालीन राजीव गांधी सरकार के निर्णय पर बहस हो सकती है, लेकिन ऑपरेशन पवन में भाग लेने वाले सैनिकों के साहस और बलिदान को हमेशा सम्मान मिलना चाहिए था। उन्होंने यह भी जोर दिया कि सैनिकों की वीरता और पराक्रम आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है।
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राजीव गांधी सरकार के फैसले पर विवाद
वर्ष 1987 में राजीव गांधी ने श्रीलंका के LTTE आतंकवादियों से लड़ने के लिए भारतीय सेना को जाफना भेजा। यह अभियान ऑपरेशन पवन के नाम से जाना गया। इस दौरान भारतीय सेना को भारी नुकसान हुआ, जिससे राजनीतिक विवाद उत्पन्न हुआ। ऑपरेशन पवन और इसमें वीरगति प्राप्त हुए सैनिकों के परिवारों की समस्याओं को कई वर्षों तक नजरअंदाज किया गया।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, “आज जब पूरा देश अपने सैनिकों के योगदान को याद कर रहा है, हमें उन शांति सैनिकों को भी स्मरण करना चाहिए जिन्होंने आईपीकेएफ के रूप में श्रीलंका में शांति स्थापना के लिए योगदान दिया।” उन्होंने बताया कि नई दिल्ली स्थित नेशनल वॉर मेमोरियल पर भी इन सैनिकों के योगदान को मान्यता दी जा रही है।
वीर सैनिकों और उनके परिवारों को सम्मान
साल 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की श्रीलंका यात्रा के दौरान, ऑपरेशन पवन में शहीद हुए सैनिकों के परिवारों को सम्मान देने की प्रक्रिया शुरू हुई थी। पिछले वर्ष अगस्त में, भारतीय सेना के वाइस चीफ लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेंद्र सिंह ने भी इस अभियान में वीरगति प्राप्त सैनिकों के परिवारों को श्रद्धांजलि अर्पित की। खुद लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेंद्र सिंह ऑपरेशन पवन के दौरान घायल हुए थे और उन्होंने इस दौरान अद्भुत साहस दिखाया।