हरियाणा वित्तीय आयुक्त डॉ. सुमिता मिश्रा ने एनसीएलटी आदेशों और न्यायालयी फैसलों का अनिवार्य पंजीकरण सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश जारी किए। स्टांप शुल्क में नुकसान पर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
हरियाणा के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्तीय आयुक्त डॉ. सुमिता मिश्रा ने राज्य के सभी संभागीय आयुक्तों और उपायुक्तों को कड़े निर्देश जारी किए हैं कि वे राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) द्वारा दिए गए आदेशों और न्यायालयी निर्णयों का अनिवार्य पंजीकरण सुनिश्चित करें।
डॉ. मिश्रा ने बताया कि सरकार के संज्ञान में आया है कि कई उप-पंजीयक और संयुक्त उप-पंजीयक एनसीएलटी आदेशों के पंजीकरण में पिछली अधिसूचनाओं और निर्देशों का पालन नहीं कर रहे हैं, जिसके कारण स्टांप शुल्क में भारी नुकसान हुआ है।
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उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 की अनुसूची 1-ए के अनुच्छेद 23-ए के तहत एनसीएलटी आदेशों पर 1.5 प्रतिशत स्टांप शुल्क लगाया जाता है, जिसकी अधिकतम सीमा 7.5 करोड़ रुपये है। गैर-वास्तविक न्यायालयी आदेश भी इसी प्रावधान के अंतर्गत आते हैं।
डॉ. मिश्रा ने सभी संभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया कि अचल संपत्ति से संबंधित स्थगन आदेश तुरंत राजस्व अभिलेखों में दर्ज किए जाएं, और स्टांप शुल्क निर्धारण तथा पंजीकरण के लिए किसी भी प्रकार की ढील न बरती जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि निर्देशों का पालन न करने वाले अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
वित्तीय आयुक्त ने कहा कि ये कदम राज्य के खजाने को होने वाले नुकसान को रोकने और न्यायालयीय आदेशों की गंभीरता बनाए रखने के लिए जरूरी हैं। सभी संभागीय आयुक्तों और उपायुक्तों को यह निर्देश अपने अधीनस्थ अधिकारियों तक पहुंचाना अनिवार्य है।