राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने लखनऊ में ब्रह्मकुमारीज संस्थान के ध्यान योग कार्यक्रम में कहा, “तकनीकी के साथ बढ़ी ईर्ष्या और दुख से बचने का उपाय है मेडिटेशन।” सीएम योगी और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल भी मौजूद थे।
लखनऊ में ब्रह्मकुमारीज संस्थान द्वारा आयोजित राज्यस्तरीय ध्यान योग कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। इस अवसर पर राष्ट्रपति ने समाज में बढ़ती ईर्ष्या और दुख के संदर्भ में बात की और कहा कि तकनीकी उन्नति के साथ यह भावनाएं भी बढ़ी हैं। उन्होंने इस समस्या से निपटने के लिए मेडिटेशन (ध्यान योग) को एक प्रभावी उपाय बताया।
मेडिटेशन से तनाव और मानसिक कठिनाइयों से मिलेगा छुटकारा
राजधानी लखनऊ के सुल्तानपुर रोड स्थित गुलजार उपवन में आयोजित इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल भी मौजूद थे। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे, जहां कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। बिना पास और जांच के किसी को भी कार्यक्रम स्थल में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई।
राष्ट्रपति मुर्मू का स्वागत बच्चियों ने मयूर नृत्य से किया, जबकि दीदियों को कलश और भाइयों को ध्वजा देकर सम्मानित किया गया। साथ ही, छत्तीसगढ़ के रंगोली कलाकार हितेश ने गुलजार दादी और राष्ट्रपति के स्वागत में खूबसूरत रंगोली बनाई। संस्थान के अतिरिक्त महासचिव राजयोगी डॉ. बीके मृत्युंजय भाई ने बताया कि राष्ट्रपति के लिए एक विशेष ध्यान कक्ष तैयार किया गया है, जहां वह कुछ समय के लिए ध्यान लगाएंगी।
also read: अहमदाबाद में 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स का आयोजन, पीएम मोदी ने…
सीएम योगी ने ध्यान योग अभियान की अहमियत पर जताया गौरव
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि ध्यान योग का यह बड़ा अभियान समाज को जोड़ने और सकारात्मक ऊर्जा फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि ब्रह्माकुमारीज ईश्वरीय विश्वविद्यालय से जुड़े सभी कार्यकर्ताओं को इस अभियान के लिए बधाई दी और इसे समाज के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया। मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति मुर्मू के संस्थान के प्रति योगदान को भी सराहा और कहा कि उनका जीवन एक प्रेरणा है, जो पार्षद से लेकर राष्ट्रपति तक के सफर को दर्शाता है।
राजयोग से आत्म-संस्कार और जीवन में शांति का संदेश
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने इस अवसर पर ब्रह्मकुमारीज संस्थान के महत्व को रेखांकित किया और कहा कि 1937 में जब समाज व्याधियों से ग्रस्त था, तब इस संस्थान की नींव रखी गई थी। यह संस्था अब राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। उन्होंने कहा कि राजयोग मेडिटेशन न केवल एक अभ्यास है, बल्कि यह एक सकारात्मक जीवनशैली है, जो व्यक्ति को आत्म-ज्ञान और शांति प्रदान करती है।
राज्यपाल ने यह भी कहा कि राजयोग से आत्मा की अमरता का बोध होता है, और यह हमें अपने कर्मों और वर्तमान परिस्थितियों के बीच संबंध को समझने में मदद करता है। उन्होंने बताया कि आध्यात्मिक अनुभव से मृत्यु का डर समाप्त हो जाता है और व्यक्ति जीवन को शांति से जीने के लिए प्रेरित होता है।
ध्यान योग के माध्यम से समाज को शांति और समृद्धि का मार्ग दिखाने का संकल्प
इस कार्यक्रम के माध्यम से ब्रह्मकुमारीज संस्थान ने समाज में शांति और सकारात्मकता फैलाने का संकल्प लिया। राजयोग और मेडिटेशन से समाज के हर व्यक्ति को मानसिक शांति और आत्मा के साथ जुड़ने का अवसर मिल सकता है। यह कार्यक्रम लोगों को तनाव और चिंता से मुक्त करने की दिशा में एक अहम कदम साबित हो सकता है।