मुआवजा समिति में अधिकारियों के साथ-साथ किसान नेताओं और प्रभावित किसानों को भी शामिल किया जाए: इसुदान गढ़वी
मोरबी के जेतपर में किसान उपवास पर बैठे हैं, इस मुद्दे को लेकर आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष इसुदान गढ़वी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। मीडिया को संबोधित करते हुए ‘आप’ नेता इसुदान गढ़वी ने कहा कि गुजरात के किसानों पर इस समय भाजपा सरकार बहुत अत्याचार कर रही है। भाजपा सरकार ऐसा व्यवहार कर रही है मानो वह कंपनियों की मालिक बन गई हो! कंपनियां निजी रूप से कमाई करने आई हैं और उन्हें करोड़ों रुपये का मुनाफा कमाना है, लेकिन अब कंपनियां किसानों की कीमत पर मुनाफा कमाने के लिए तैयार हो गई हैं। भाजपा सरकार इन कंपनियों के साथ मिलकर, उनके पक्ष में खड़ी होकर पुलिस संरक्षण उपलब्ध कराकर किसानों पर अत्याचार कर रही है। उन्होंने आगे कहा कि आज मोरबी के जेतपर में जो किसान अपनी बहुमूल्य जमीन बचाने के लिए पिछले आठ दिनों से आमरण अनशन पर बैठे हैं, उनमें महिलाएं भी शामिल हैं। उनकी तबीयत अब नाजुक होने लगी है। ऐसे में आज आम आदमी पार्टी के एक सिपाही के रूप में मुझे और आम आदमी पार्टी के लाखों कार्यकर्ताओं को बहुत चिंता हो रही है कि यह बहरी-गूंगी सरकार के मंत्री और मुख्यमंत्री एसी चेंबर में आराम कर रहे हैं, जबकि पूरे देश को अनाज खिलाने वाला मेरा किसान आज भूखा बैठा है। इस समय किसानों की हालत बहुत नाजुक हो गई है, इसलिए सरकार से हमारी पहली मांग है कि मुख्यमंत्री और मंत्री जेतपर गांव के लोगों से मिलें, उनकी मांगों को यथासंभव स्वीकार करें और जल्द से जल्द उनका अनशन तुड़वा कर समाप्त करवाएं। मुझे जहां तक जानकारी है, यह भाजपा के ही एक मंत्री का गांव है। उसी मंत्री के गांव में पहले किसानों पर लाठियां बरसाई गईं और अब किसान आमरण अनशन पर बैठे हैं, जिनकी तबीयत भी बिगड़ रही है। इसलिए सरकार एक घंटे का भी समय बर्बाद किए बिना मुख्यमंत्री स्तर पर इन किसानों के साथ तुरंत बैठक करे और इस समस्या का उचित समाधान निकाले।
इसुदान गढ़वी ने आगे कहा कि दूसरी मेरी बात यह है कि यह केवल जेतपर का ही मुद्दा नहीं है। जिस प्रकार जानकारी मिली है और समाचार पत्रों में भी छपा है, उसके अनुसार गुजरात में निजी कंपनियों और भाजपा के कुछ बड़े नेताओं के बीच गुप्त बैठकें हुई हैं। पूरे गुजरात में मकड़ी के जाले की तरह खंभे लगाकर हाईटेंशन बिजली लाइनें बिछाने की एक बहुत बड़ी योजना तैयार की गई है। सरकार को इस बारे में स्पष्ट करना चाहिए कि कितनी लाइनें डाली जानी हैं, कब डाली जानी हैं और किस प्रकार डाली जानी हैं? हमें मिली प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह योजना केवल जेतपर, मोरबी, कच्छ, द्वारका, राजकोट या जामनगर तक सीमित नहीं है। सरकार ने गुजरात के 26 जिलों से ऐसी 100 भारी हाईटेंशन लाइनें निकालने का निर्णय किया है। वह भी किसानों की कीमत पर और उनकी उपजाऊ जमीन से, किसी बंजर जमीन से नहीं! अनुमानतः एक लाइन की लंबाई 500 किलोमीटर है और ऐसी 100 लाइनें डालने का निर्णय लिया गया है। यदि एक लाइन में लगभग 1500 खंभे आते हैं, तो सोचिए कि 100 लाइनों में कितने खंभे आएंगे? यानी लगभग डेढ़ लाख खंभे किसानों के खेतों में, उनकी कलेजे के टुकड़े समान जमीन की छाती चीरकर लगाए जाएंगे और इसके लिए पुलिस संरक्षण भी तैयार रखा गया है। इसलिए मैं सरकार से आग्रह करता हूं कि किसानों पर अत्याचार करना बंद करें।
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आप किसानों पर अत्याचार करेंगे, पुलिस भेजेंगे, झूठे मुकदमे करेंगे, डराएंगे या धमकाएंगे, तो शायद किसान कुछ समय के लिए पीछे हट जाएंगे, लेकिन कम से कम ईश्वर और अपने भगवान का तो डर रखिए! यदि आपकी यह योजना किसानों के हित में है, तो स्थानीय स्वराज्य चुनावों से पहले आपने यह काम क्यों शुरू नहीं किया? यदि आपकी नीयत साफ होती तो सरकार किसानों के साथ समझौता करती। यदि मुआवजा पूरा नहीं देना है और अन्याय ही करना है, तो मैं सरकार को चुनौती देता हूं कि चुनाव से तीन महीने पहले, अक्टूबर 2027 में इन खंभों को लगाने का काम शुरू करके दिखाइए, तब पता चलेगा कि आपमें कितनी हिम्मत है! स्थानीय स्वराज्य चुनाव खत्म हो गए और विधानसभा चुनाव में अभी डेढ़-दो साल का समय बाकी है, तब आपने यह काम शुरू किया है। इसलिए सरकार की नीयत पर सवाल उठता है। सवाल इसलिए उठता है क्योंकि इसमें मेरे लाखों किसान पीड़ित हो रहे हैं। एक अनुमान के अनुसार, प्रति किलोमीटर 77 बीघा जमीन इससे प्रभावित होती है। मैं सभी किसानों से भी कहना चाहता हूं कि अब सभी एक हो जाइए। आज यह आपदा किसी एक के खेत में है, कल आपके भाई के या आपके खेत में आएगी, क्योंकि यह करोड़ों रुपये की बड़ी योजना है। इस योजना से लगभग 38 लाख बीघा जमीन पर खंभे लगने की संभावना है, जिसमें साढ़े पांच लाख से अधिक किसान और उनके परिवार तथा मजदूर मिलाकर लगभग 30 से 40 लाख लोग प्रभावित होने वाले हैं, फिर भी इस विषय पर कोई चर्चा नहीं हो रही है।
इसुदान गढ़वी ने आगे कहा कि सरकार से मेरी सीधी मांग है कि इस मुद्दे पर कलेक्टर स्तर की नहीं बल्कि राज्य स्तर (State Level) की ‘मुआवजा समिति’ का गठन किया जाए। इस समिति में उच्च अधिकारी, केंद्र के प्रतिनिधि और साथ ही प्रभावित किसानों के प्रतिनिधि भी शामिल होने चाहिए। मुआवजा इस प्रकार निर्धारित किया जाए कि अगले 25 वर्षों बाद जमीन की जो अनुमानित कीमत होगी, उसे ध्यान में रखा जाए। सरकार किसानों को इस योजना में भागीदार बनाए या फिर ऐसा मुआवजा दे कि प्रति खंभा प्रति माह एक लाख रुपये जैसा किराया मिले। जो भी मुआवजा तय हो, उसमें किसानों की सहमति अनिवार्य हो। आम आदमी पार्टी किसानों के साथ है और इस मामले में हम अंतिम सांस तक संघर्ष करेंगे। आगामी 27 तारीख को सुरेंद्रनगर में शाम 4 बजे आम आदमी पार्टी द्वारा राज्य स्तरीय ‘किसान महापंचायत’ का आयोजन किया गया है। जिसमें इन सभी मुद्दों पर चर्चा कर प्रस्ताव पारित किए जाएंगे और उसके बाद चरणबद्ध आंदोलन के कार्यक्रम दिए जाएंगे। यदि सरकार हमारी इन न्यायसंगत मांगों को स्वीकार नहीं करती, तो आगामी समय में सभी जिलों में आम आदमी पार्टी इस हाईटेंशन लाइन के विरोध में उग्र कार्यक्रम करेगी। दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी के विधायक जिन्होंने आदिवासी समाज की आवाज बनने का ‘गुनाह’ किया है, आदिवासियों को जागरूक करने का काम किया है, उनके खिलाफ सरकार दुर्भावना रख रही है। भाजपा ने साम, दाम, दंड और भेद की नीति अपनाकर, डराकर-धमकाकर उन्हें भाजपा में लाने के सभी प्रयास किए, लेकिन जब वे प्रयास असफल हो गए तो चैतरभाई वसावा पर डे-टू-डे (रोजमर्रा) मुकदमा चलाकर सात साल की सजा करवा दी गई। इस अन्याय को लेकर पूरे आदिवासी समाज के युवाओं, महिलाओं, माताओं-बहनों और बेटियों में भाजपा के खिलाफ भारी रोष है और पूरे गुजरात में इसका विरोध हो रहा है। इस मुद्दे पर आम आदमी पार्टी ने तय किया है कि हम 26 तारीख को सभी जिलों में ‘आई सपोर्ट चैतर वसावा’ (I Support Chaitar Vasava) के नारे के साथ जनजागरण अभियान या रैली निकालेंगे। इसके बाद 28 तारीख और 30 तारीख को भी हमने विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया है। इसके अंतर्गत विधानसभा और जिला पंचायत स्तर पर लगभग 1000 छोटी-बड़ी बैठकों का आयोजन कर चैतरभाई वसावा के समर्थन में ‘सिग्नेचर कैंपेन’ (हस्ताक्षर अभियान) चलाया जाएगा। हम लोगों को जागरूक करेंगे कि किस प्रकार आदिवासी समाज की आवाज बने और गरीब किसानों-आदिवासियों के लिए लड़ने वाले एक लोकप्रिय विधायक को भाजपा ने झूठे मामले में फंसाकर यह सजा दिलवाई है। इस कानूनी लड़ाई के लिए आज ही हमने अपने 8 विशेषज्ञ वकीलों की एक टीम बनाई है, जिसमें दिल्ली स्तर के तथा गुजरात के नामी वकील शामिल हैं। अगले दो से तीन दिनों के भीतर ही हम हाईकोर्ट में इस सजा के खिलाफ अपील करने जा रहे हैं। इस मामले में यदि हमें हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट तक भी लड़ना पड़े, तो चैतरभाई और उनके साथी मित्रों के लिए आम आदमी पार्टी सर्वोच्च न्यायालय तक लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है।