अगर सरकार की नीयत अच्छी होती तो पेपर लीक मामलों में सख्त एक्शन लेकर सिस्टम को ठीक करती- अरविंद केजरीवाल
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पेपर लीक और गड़बड़ी के मामलों में केंद्र सरकार के ढुलमुल रवैये पर सवाल उठाया है। साथ ही उन्होंने देश की जनता से सड़कों पर उतरने की अपील करते हुए कहा कि अपने बच्चों, परिवार और देश के लिए एकजुट होकर सरकार से मांग करें कि बस, अब और नहीं सहेंगे। उन्होंने कहा कि पेपर लीक अरबों खरबों का धंधा है। इस धंधे में बहुत बड़े-बड़े लोग शामिल हैं। जब तक आप सब लोग सड़कों पर उतर कर सरकार को मजबूर नहीं करोगे, तब तक ये धंधा बंद नहीं होगा और अगले साल ऐसे ही सारे पेपरों में फिर से गड़बड़ होगी।
शुक्रवार को अरविंद केजरीवाल ने एक्स पर एक वीडियो संदेश में कहा कि पेपर लीक अरबों-खरबों का धंधा है और उसमें बहुत बड़े-बड़े लोग शामिल हैं। यह पेपर लीक बंद क्यों नहीं हो रहा? हर दो-तीन साल में पेपर लीक हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब में चार साल से आम आदमी पार्टी की सरकार है। इन चार सालों में एक भी पेपर लीक नहीं हुआ। किसी पेपर में कोई गड़बड़ी नहीं हुई। 10 साल हमने दिल्ली में भी सरकार चलाई। दिल्ली में भी कोई पेपर लीक नहीं हुआ। किसी पेपर में कोई गड़बड़ी नहीं हुई। लेकिन केंद्र सरकार के हर पेपर में गड़बड़ी हो रही है। हर पेपर लीक हो रहा है, कोई न कोई गड़बड़ी हो रही है। यह सब नियत का सवाल है। उनकी नियत खराब है और हमारी नियत साफ है।
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अरविंद केजरीवाल ने आगे कहा कि पेपर लीक के दो उदाहरण लिए जा सकते हैं। पहला, सीबीएसई का पेपर। ओएसएम का ठेका ऐसी कंपनी को दिया गया, जिसने तेलंगाना के पेपरों में भारी गड़बड़ की थी। तेलंगाना में एग्जाम में उस कंपनी ने इतनी गड़बड़ की थी कि उसे ब्लैकलिस्ट किया गया। उसकी गड़बड़ियों की वजह से 20 से ज्यादा बच्चों ने तेलंगाना में सुसाइड कर लिया और उस कंपनी को केंद्र सरकार ने पूरे देश का ठेका दे दिया क्योंकि केंद्र सरकार की नियत खराब थी। इसका नतीजा यह हुआ कि लाखों बच्चों का भविष्य खराब हो गया।
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि अभी तक उस कंपनी के खिलाफ कोई एक्शन नहीं हुआ है और न कोई एफआईआर हुई और कोई गिरफ्तार नहीं हुआ। बस एक कमेटी बना दी गई। कमेटी अपना काम करती रहेगी। सीबीएसई के चेयरमैन को हटाकर उन्हें एग्रीकल्चरल सेक्रेटरी बना दिया गया। बस, इसके अलावा किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसका मतलब है कि सारे घोटाले पर पर्दा डाला जा रहा है और घोटालेबाजों को बचाने की कोशिश की जा रही है। अगले साल भी इन्हें पेपर लीक करना है और अगले साल भी इन्हें ओएसएम में धांधली करनी है। यह अरबों-खरबों का घोटाला है और इनकी नियत खराब है।
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि दूसरा उदाहरण नीट के पेपर का ले सकते हैं। मीडिया में कहा जा रहा है कि पेपर सेटिंग की स्टेज पर पेपर लीक हुआ। और उसका समाधान सरकार यह निकाल रही है कि पेपरों की ट्रांसपोर्टेशन अब एयरफोर्स के जहाजों द्वारा की जाएगी। अगर पेपर सेटिंग के दौरान पेपर लीक हुआ है, तो पेपर जहाज से ट्रांसपोर्ट करने से वह पेपर लीक कैसे रुकेगा? असल में इन्हें पेपर लीक रोकना ही नहीं है। सारे घोटाले पर पर्दा डाला जा रहा है और घोटालेबाजों को बचाया जा रहा है, क्योंकि अगले साल फिर से पेपर लीक करने हैं और फिर से अरबों-खरबों रुपए कमाने हैं।
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि पेपर लीक बहुत बड़ा धंधा है और इस धंधे में बहुत बड़े-बड़े लोग शामिल हैं। जब तक सब लोग मिलकर आवाज नहीं उठाएंगे और सड़कों पर नहीं उतरेंगे, तब तक यह सिस्टम नहीं बदलने वाला है। आप सबको मिलकर आवाज उठानी होगी और सरकार को मजबूर करना पड़ेगा कि सरकार इस पूरे सिस्टम को ठीक करे, वरना यह ठीक नहीं होने वाला है।