अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 7 अपीलों को लेकर सवाल उठाते हुए देश की अर्थव्यवस्था, नीतियों और मिडिल क्लास पर पड़ रहे बोझ पर चिंता जताई। जानिए उन्होंने क्या कहा।
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से हाल ही में की गई 7 अपीलों को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। मंगलवार को दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज के साथ आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने इन अपीलों को देश के इतिहास में अब तक के सबसे कठोर कदम बताया।
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि आजादी के बाद भारत ने कई बड़े संकटों का सामना किया है—युद्ध, आर्थिक चुनौतियाँ और वैश्विक मंदी—लेकिन इस तरह के व्यापक और सख्त निर्देश पहले कभी नहीं दिए गए।
अर्थव्यवस्था की स्थिति पर सरकार से स्पष्टता की मांग
प्रेस कॉन्फ्रेंस में केजरीवाल ने सबसे पहले देश की आर्थिक स्थिति पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यदि सरकार इतने सख्त कदम लेने को मजबूर है, तो इसका अर्थ है कि अर्थव्यवस्था की स्थिति चिंताजनक हो सकती है।
उन्होंने मांग की कि सरकार को देश की आर्थिक स्थिति के बारे में स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए, ताकि लोगों के बीच भ्रम और अफवाहों का माहौल न बने। अरविंद केजरीवाल ने कहा कि देशवासियों को यह जानने का अधिकार है कि वर्तमान आर्थिक स्थिति क्या है और आने वाले समय में इसका क्या प्रभाव पड़ सकता है।
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अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को लेकर भी जताई आशंका
अरविंद केजरीवाल ने अपनी बात रखते हुए अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर चल रहे संघर्षों का असर पूरी दुनिया पर पड़ता है, लेकिन इसके बावजूद किसी अन्य देश ने इस तरह के सख्त और व्यापक प्रतिबंधात्मक कदम नहीं उठाए हैं।
उन्होंने सवाल किया कि क्या मौजूदा फैसलों के पीछे केवल अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियाँ ही कारण हैं या फिर देश के भीतर भी कुछ और गंभीर स्थिति मौजूद है, जिसे सरकार स्पष्ट नहीं कर रही है।
इस दौरान केजरीवाल से जुड़ी एक गलती भी सामने आई, जहां उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संघर्ष का उल्लेख करते हुए अलग-अलग देशों के संदर्भ में भ्रमित होकर बात दोहराई।
मिडिल क्लास पर बोझ को लेकर सरकार पर निशाना
अपने तीसरे बड़े सवाल में केजरीवाल ने कहा कि सरकार द्वारा दिए जा रहे निर्देशों का सबसे ज्यादा असर मध्यम वर्ग (मिडिल क्लास) पर पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार आम लोगों से ही त्याग और संयम की अपेक्षा की जा रही है।
उन्होंने कहा कि विदेश यात्रा न करने, ईंधन की खपत सीमित करने और खर्च कम करने जैसी अपीलें सीधे तौर पर मध्यम वर्ग को प्रभावित कर रही हैं।
अरविंद केजरीवाल ने सवाल उठाया कि ऐसे कदमों का बोझ सबसे पहले सरकार, उसके मंत्रियों और उच्च अधिकारियों पर क्यों नहीं डाला जा रहा है। उनके अनुसार, यदि वास्तव में देश को बचत और संयम की जरूरत है, तो इसकी शुरुआत शीर्ष स्तर से होनी चाहिए।
अमीर वर्ग और उद्योगपतियों को लेकर भी उठाए सवाल
AAP प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने यह भी कहा कि बड़े उद्योगपतियों और संपन्न वर्गों से इस तरह की कोई समान अपील नहीं की गई है। उन्होंने तर्क दिया कि जब देश को सामूहिक योगदान की जरूरत है, तो केवल मध्यम वर्ग को ही लक्षित करना उचित नहीं है।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या प्रभावशाली और आर्थिक रूप से मजबूत वर्गों से भी समान योगदान की अपेक्षा की जा रही है या नहीं।