ज्येष्ठ मासिक शिवरात्रि 2026: कब है व्रत, जानें तिथि, पूजा मुहूर्त और दुर्लभ योग का महत्व

ज्येष्ठ मासिक शिवरात्रि 2026: कब है व्रत, जानें तिथि, पूजा मुहूर्त और दुर्लभ योग का महत्व

ज्येष्ठ मासिक शिवरात्रि 2026 की तिथि, पूजा मुहूर्त और शुभ योग जानें। इस दिन व्रत व रुद्राभिषेक से भगवान शिव की कृपा, सुख-समृद्धि और मोक्ष प्राप्ति का महत्व समझें।

ज्येष्ठ मासिक शिवरात्रि 2026: हिंदू धर्म में मासिक शिवरात्रि का विशेष महत्व माना गया है। यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य मिलन का प्रतीक होता है। इसी क्रम में इस वर्ष की ज्येष्ठ मासिक शिवरात्रि 15 मई 2026, शुक्रवार को मनाई जाएगी। इस दिन व्रत और शिव साधना से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। साथ ही इस बार वृषभ संक्रांति का संयोग भी बन रहा है, जो इस दिन को और अधिक शुभ बनाता है।

ज्येष्ठ मासिक शिवरात्रि 2026 की तिथि और समय

पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 15 मई 2026 को सुबह 8 बजकर 31 मिनट पर शुरू होगी और इसका समापन 16 मई 2026 को सुबह 5 बजकर 11 मिनट पर होगा। इसी दिन रात को शिवरात्रि की पूजा की जाएगी।

पूजा मुहूर्त और शुभ योग

इस वर्ष शिवरात्रि की विशेष पूजा का समय रात 11 बजकर 57 मिनट से लेकर 16 मई की देर रात 12 बजकर 38 मिनट तक रहेगा। इस दिन आयुष्मान योग और सर्वार्थ सिद्धि योग जैसे दुर्लभ संयोग भी बन रहे हैं, जो पूजा के फल को कई गुना बढ़ा देते हैं।

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मासिक शिवरात्रि पर रुद्राभिषेक का महत्व

इस दिन रुद्राभिषेक का विशेष महत्व होता है। श्रद्धालु शिवलिंग पर जल, दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक करते हैं। माना जाता है कि इस दौरान “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करने से मन शांत होता है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। भक्त शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, फल, फूल और चंदन अर्पित कर पूजा पूर्ण करते हैं।

मनोकामना पूर्ति के लिए अभिषेक के उपाय

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अलग-अलग पदार्थों से अभिषेक करने के अलग-अलग लाभ होते हैं। जल से अभिषेक करने पर वर्षा और शांति की प्राप्ति होती है। दही से अभिषेक करने पर सुख-सुविधा और संपत्ति में वृद्धि होती है। गन्ने के रस से मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है, जबकि शहद और घी से धन और समृद्धि बढ़ती है। तीर्थ जल से अभिषेक करने पर मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।

मासिक शिवरात्रि के लाभ

माना जाता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। यह दिन मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और जीवन में संतुलन लाने में सहायक होता है। विवाहित जीवन में मधुरता आती है और अविवाहित लोगों के विवाह संबंधी बाधाएं दूर होती हैं।

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