इसुदान गढ़वी: सुरेंद्रनगर के कोंढ गांव में पुलिस ने किसानों पर जो अत्याचार किया, वह असहनीय है

इसुदान गढ़वी: सुरेंद्रनगर के कोंढ गांव में पुलिस ने किसानों पर जो अत्याचार किया, वह असहनीय है

AAP की सरकार होती तो इस तरह किसानों के खेतों में खंभे लगाने की किसी की हिम्मत नहीं होती: इसुदान गढ़वी

आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष इसुदान गढ़वी ने कहा कि सुरेंद्रनगर के कोंढ गांव में किसानों पर जिस तरह अत्याचार किया गया, वह असहनीय है। उन्होंने कहा कि किसान के बेटे के रूप में ऐसे दृश्य देखना भी मुश्किल हो जाता है। केवल एक गांव ही नहीं बल्कि राज्य के कई गांवों में कंपनियों के लिए पुलिस और प्रशासन किसानों की जमीन में जबरदस्ती खंभे और पवनचक्कियां खड़ी करने के लिए दबाव बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि कंपनियां किसानों की जमीन से करोड़ों की कमाई करती हैं, लेकिन किसानों को उचित मुआवजा नहीं मिलता। कंपनियां कमाती हैं, नेता और अधिकारी भी कमाते हैं, लेकिन जो किसान असली मालिक है उसे केवल थोड़ा सा मुआवजा देकर शांत कर दिया जाता है। इसुदान गढ़वी ने सरकार से अपील की कि किसानों को भी हर साल कंपनी की आय में से हिस्सा मिलना चाहिए या गांव की गौचर और खेती की जमीन के लिए नियमित मुआवजा तय होना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसान फसल बीमा, खाद की लाइनें, उपज बेचने की परेशानियां और लगातार मेहनत के बावजूद सरकार को वोट देते हैं, लेकिन सिस्टम में गड़बड़ी होने के कारण किसानों को न्याय नहीं मिलता। उन्होंने कहा कि यदि किसान समाज एक हो जाए तो सरकार के पास एक भी सीट जीतने की ताकत नहीं रहेगी, लेकिन किसान जाति, धर्म और क्षेत्रों में बंटे होने के कारण सरकारें उसका फायदा उठाती हैं।

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AAP नेता इसुदान गढ़वी ने आगे कहा कि कच्छ से लेकर जामनगर और सुरेंद्रनगर तक कई गांवों में निजी कंपनियां किसानों की जमीन में खंभे लगा रही हैं और किसानों पर दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जहां-जहां भाजपा को जिताया गया है, वहां भाजपा के लोग खंभे लगा रहे हैं और वहां किसानों पर ज्यादा अत्याचार हो रहे हैं। उन्होंने सरकार से अपील की कि कच्छ से जामनगर तक जहां-जहां बिजली की लाइनें जा रही हैं, वहां किसानों का एक प्रतिनिधिमंडल बनाकर सरकार के साथ बैठक आयोजित की जाए और उचित मुआवजा तय किया जाए। उन्होंने कहा कि कुछ क्षेत्रों में किसान आत्महत्या की स्थिति तक पहुंच गए हैं, जो बहुत चिंताजनक बात है। कंपनियां कमाएं इस पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन किसानों की जमीन पर काम करके किसानों को उचित मुआवजा न मिलना अन्याय है। यदि आम आदमी पार्टी की सरकार होती तो कलेक्टर या एसपी भी किसान की अनुमति के बिना किसान के खेत में घुस नहीं सकते थे। हम ऐसे नियम बनाते कि कंपनियां जो कमाएं उसमें से कुछ प्रतिशत हर साल किसानों को दिया जाए। आप यह सब नहीं कर सकते तो कम से कम किसानों को उचित मुआवजा तो दीजिए। इसुदान गढ़वी ने सभी दलों के किसानों, किसान नेताओं और किसान संगठनों से अपील की कि किसानों के लिए एक हों। उन्होंने कहा कि किसानों के मुद्दों के लिए सभी को आवाज उठानी चाहिए, सोशल मीडिया पर किसानों को समर्थन देना चाहिए और किसानों के अधिकारों के लिए संयुक्त लड़ाई लड़नी चाहिए।

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