गांधीनगर में AAP प्रदेश अध्यक्ष इसुदान गढ़वी ने कच्छ में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पुलिस व्यवस्था, ड्रग्स, शराब के अड्डों और एट्रोसिटी एक्ट को लेकर गंभीर आरोप लगाए। जानें उनके पूरे बयान की मुख्य बातें।
आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष इसुदान गढ़वी गांधीधाम पहुंचे थे। यहां पत्रकार परिषद को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि गुजरात में पुलिस दो तरह से काम करती है। पुलिस संविधान के अनुसार काम नहीं करती। वह भाजपा की दलाल बनकर काम कर रही है। पुलिस में कुछ लोग भाजपा के दलाल बन गए हैं और अधिकारियों के लिए सिर्फ भाजपा का खेस पहनना बाकी रह गया है, ऐसा लगता है। आप देखें तो शराब के अड्डे खुलेआम चल रहे हैं। भाजपा के नेता, पुलिस अधिकारी और पुलिस मलाई खा रहे हैं। जनता पिस रही है, युवा नशे में बर्बाद हो रहे हैं। कच्छ में ड्रग्स बेफाम तरीके से बिक रहा है। शराब के अड्डे चल रहे हैं और उनमें हमारे नेता कायनातबेन अंसारी, जो एक प्रसिद्ध डॉक्टर और स्पेशलिस्ट हैं, वे जनता के काम करने के लिए आम आदमी पार्टी में जुड़े हैं। जनता उनके पास जाकर कहती है कि यहां शराब खुलेआम बिक रही है, शराब के अड्डे चल रहे हैं। इसके बाद आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने जनता रेड की। जनता रेड के दौरान फेसबुक लाइव भी किया गया, जिसमें दिखाया गया कि कैसे वहां शराबी बैठे हैं, शराब पी रहे हैं और शराब बेची जा रही है। आगे उन्होंने कहा कि कच्छ के एसपी और उनके अधिकारियों को वेतन इसलिए मिलता है कि कच्छ में शराब न बिके। इसके लिए कच्छ के एसपी को बंगला और गाड़ी दी गई है। लेकिन दुख के साथ कहना पड़ता है कि कच्छ के एसपी शराब के अड्डे बंद करने में रुचि लेते हैं या फिर शराब के अड्डे बंद करवाने जाने वालों में रुचि लेते हैं?
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एट्रोसिटी एक्ट अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों को संरक्षण देने के लिए बनाया गया कानून है। दलित और आदिवासी समाज के लोगों पर होने वाले अत्याचार के खिलाफ उन्हें सुरक्षा मिले इसके लिए यह कानून बनाया गया है। लेकिन भाजपा और गुजरात की पूर्व कच्छ पुलिस इस कानून को कमजोर बनाने का षड्यंत्र कर रही है ऐसा लगता है। मुझे सुनने में आया है कि पुलिस के दबाव और नाराजगी के कारण कई बार लोग एट्रोसिटी का केस दर्ज कराने के लिए मजबूर हो जाते हैं। जब एट्रोसिटी की शिकायत होती है तब मैंने अधिकारियों से बात की है, लेकिन अधिकारियों की तरफ से कई बार उल्टे-सीधे जवाब दिए जाते हैं, जिससे सामान्य जनता का न्याय के प्रति विश्वास डगमगा जाता है। लोग सवाल करते हैं कि क्या यह कानून हमारे संरक्षण के लिए है या नहीं। जब मैं अधिकारियों को फोन करता हूं तो इस उम्मीद के साथ करता हूं कि वे संविधान और कानून का पालन करेंगे। हमने पहले भी एसपी को इस मुद्दे पर प्रस्तुति दी थी। जब समाज पर अत्याचार होता है तब एट्रोसिटी का केस होता है, लेकिन कई बार ऐसी शिकायतें भी सामने आती हैं कि कुछ लोग व्यक्तिगत दुश्मनी या अन्य कारणों से झूठी शिकायतें भी दर्ज कराते हैं। ऐसी स्थिति में असली पीड़ितों को न्याय मिलना और भी कठिन हो जाता है। यह कानून गरीब और पीड़ित समाज को सुरक्षा देने के लिए बनाया गया है और हम उसकी भावना का सम्मान करते हैं। लेकिन वास्तव में देखा जाए तो गुजरात में कई लोग खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करते। अधिकांश एट्रोसिटी से संबंधित शिकायतें सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंची हैं और कई जगह यह दर्ज हुआ है कि कुछ शिकायतें झूठी भी साबित हुई हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि कानून की आवश्यकता नहीं है, लेकिन कानून का दुरुपयोग न हो इसके लिए भी सतर्क रहना जरूरी है। दलित और आदिवासी समाज को सुरक्षा देने के लिए बनाया गया यह कानून सही अर्थ में लागू हो और उसका गलत उपयोग न हो इसके लिए व्यवस्था मजबूत होना जरूरी है।
AAP પૂર્વ કચ્છ જિલ્લા પ્રમુખ ડૉ કાયનાત અન્સારીએ કચ્છના ગાંધીધામમાં ચાલતા દારૂના અડ્ડા પર જનતા રેડ કરી તેનો પર્દાફાશ કર્યો હતો ત્યારે આ જનતા રેડ બાદ તેમને ખોટા કેસમાં ફસાવી જેલમાં મોકલવામાં આવ્યા છે તેના વિરોધમાં પ્રદેશ પ્રમુખ શ્રી @isudan_gadhvi એ ગાંધીધામ SP કચેરી ખાતે રજૂઆત… pic.twitter.com/4GkVoYvZQS
— AAP Gujarat (@AAPGujarat) March 13, 2026
इसुदान गढ़वी ने आगे कहा कि कायनातबेन और आम आदमी पार्टी के नेता जनता रेड जारी रखेंगे। आने वाले समय में आम आदमी पार्टी के नेता पूरे गुजरात में जनता रेड करेंगे। अगर आपके पास ताकत है तो पचास हजार लोगों को जेल में डालकर दिखाओ। मैं भी देखूंगा कि हर्ष संघवी और भूपेंद्र पटेल की ‘सिंघम’ पुलिस में कितनी ताकत है। आज कच्छ में एक युवक ने आत्महत्या की है, लेकिन पुलिस उसे न्याय नहीं दे पा रही है। भाजपा के नेताओं को पकड़ने में पुलिस डरती है, जबकि आम आदमी पार्टी के नेताओं के खिलाफ ‘सिंघम’ बन जाती है। ब्रह्म समाज के बेटे ने सुसाइड नोट लिखकर आत्महत्या की, सुसाइड नोट में भाजपा के नेताओं सहित 18 लोगों के नाम लिखे लेकिन पुलिस ने भाजपा के 16 लोगों को हाथ भी नहीं लगाया और दो जो भाजपा के नहीं हैं उनकी गिरफ्तारी की, क्या यही ‘सिंघम’ पुलिस है? इसका मतलब है कि कानून व्यवस्था भाजपा के इशारे पर चल रही है।