पेट साफ तो दिमाग तंदरुस्त: जानिए कैसे जुड़ा है आपका Digestive System और मानसिक सेहत आपस में

by editor

“पेट साफ तो दिमाग साफ” सिर्फ एक पुरानी कहावत नहीं, बल्कि इसके पीछे ठोस वैज्ञानिक आधार है। अगर हम अपने Digestive System का अच्छे से ध्यान रखें, तो न सिर्फ हमारा शरीर बल्कि मानसिक स्वास्थ्य भी बेहतर रहता है। इसलिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और तनावमुक्त जीवनशैली अपनाकर हम शारीरिक और मानसिक दोनों सेहत को बेहतर बना सकते हैं।

आपने अक्सर सुना होगा कि जब पेट साफ रहता है तो मन भी खुश रहता है। इसका कारण यह है कि पेट और दिमाग के बीच गहरा संबंध होता है। जब Digestive System सही ढंग से काम करता है, तो मानसिक स्थिति भी संतुलित रहती है। लेकिन क्या आपने कभी इसके पीछे का वैज्ञानिक कारण जानने की कोशिश की है? हालिया रिसर्च से पता चला है कि हमारे पेट और मस्तिष्क के बीच एक मजबूत जुड़ाव होता है। पेट को ‘दूसरा दिमाग’ भी कहा जाता है, क्योंकि इसका असर सीधा हमारी मानसिक सेहत पर पड़ता है।

शरीर में पेट और मस्तिष्क के बीच एक संचार तंत्र होता है, जिसे “गट-ब्रेन एक्सिस” कहा जाता है। इस प्रणाली के जरिए दोनों अंग आपस में लगातार सिग्नल का आदान-प्रदान करते हैं। पेट में मौजूद करोड़ों लाभदायक और हानिकारक बैक्टीरिया न सिर्फ पाचन को प्रभावित करते हैं, बल्कि यह हमारे मूड, याददाश्त और सोचने की क्षमता पर भी असर डालते हैं।

पेट में मौजूद बैक्टीरिया और उनका मानसिक स्वास्थ्य से संबंध – 
पेट में पाए जाने वाले बैक्टीरिया ऐसे रासायनिक तत्व (न्यूरोट्रांसमीटर्स) जैसे सेरोटोनिन और डोपामिन बनाते हैं, जो हमारे मूड और भावनाओं को संतुलित करते हैं। यही वजह है कि जब पाचन तंत्र गड़बड़ होता है, तो चिड़चिड़ापन, तनाव और डिप्रेशन जैसी मानसिक समस्याएं भी बढ़ने लगती हैं।

क्या पेट की गड़बड़ी मानसिक परेशानियों का कारण बन सकती है? –
किसी व्यक्ति को लगातार गैस, कब्ज, अपच, एसिडिटी या इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS) जैसी पेट की दिक्कतें बनी रहती हैं, तो इसका असर धीरे-धीरे मानसिक स्वास्थ्य पर भी दिखने लगता है। ऐसे लोग चिंता और अवसाद की चपेट में जल्दी आ सकते हैं।

इनके अलावा नींद का बिगड़ना, लगातार थकान महसूस होना, चिड़चिड़ापन और ध्यान केंद्रित करने में परेशानी जैसी समस्याएं भी देखी जाती हैं। जब पेट की सेहत बिगड़ती है, तो शरीर में सूजन बढ़ जाती है, जो मस्तिष्क के कामकाज पर नकारात्मक असर डालती है।

संतुलित आहार से दिमाग रहेगा सक्रिय –
अगर आपका पेट स्वस्थ है, तो दिमाग भी बेहतर तरीके से कार्य करेगा। पेट साफ और संतुलित रहने से मानसिक क्षमता में भी सुधार आता है। वे सुझाव देते हैं कि दिमाग को तेज बनाना है तो सबसे पहले पाचन तंत्र की देखभाल करें।

इसके लिए अपने आहार में फाइबर युक्त चीजें जैसे हरी सब्जियां, फल, साबुत अनाज, दही, छाछ और प्रोबायोटिक खाद्य पदार्थ शामिल करें। प्रोबायोटिक खाद्य पदार्थ अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाते हैं, जिससे न केवल पाचन बल्कि मानसिक सेहत भी बेहतर होती है।

साथ ही जंक फूड, तैलीय, अत्यधिक मसालेदार और प्रोसेस्ड चीजों से बचें क्योंकि ये पेट के बैक्टीरिया का संतुलन बिगाड़ सकते हैं। पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, ताकि शरीर से विषैले पदार्थ आसानी से बाहर निकल सकें।

तनाव कम करें, पेट और दिमाग दोनों रहेंगे स्वस्थ – 
आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में तनाव आम बात हो गई है, लेकिन यह तनाव पाचन को भी प्रभावित करता है। लगातार टेंशन में रहने से पाचन क्षमता घटती है और पेट संबंधी समस्याएं बढ़ जाती हैं। इसलिए मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए जरूरी है कि आप योग, ध्यान, गहरी सांसें लेने की तकनीक और भरपूर नींद को अपनी दिनचर्या में शामिल करें। इससे न सिर्फ दिमाग शांत रहेगा बल्कि पेट भी अच्छी तरह काम करेगा।

व्यायाम से मिलेगा दोहरा फायदा 
नियमित हल्के व्यायाम जैसे सैर, साइकिल चलाना या योग करना पेट और दिमाग दोनों के लिए फायदेमंद होता है। व्यायाम करने से शरीर में पॉजिटिव हार्मोन बनते हैं जो न सिर्फ मूड सुधारते हैं बल्कि पाचन को भी दुरुस्त रखते हैं।

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