Sunday, May 10, 2026

Holashtak 2026: होलाष्टक में भूलकर भी न करें ये 5 काम, बनाएं सुखी और समृद्ध जीवन

by Neha
Holashtak 2026: होलाष्टक में भूलकर भी न करें ये 5 काम, बनाएं सुखी और समृद्ध जीवन

Holashtak 2026: 24 फरवरी से 3 मार्च तक होलाष्टक, जानें किन 5 कामों से बचें और इस पावन समय में पूजा, दान और मंत्र जाप का लाभ उठाएं।

Holashtak 2026: होलाष्टक का समय होलिका दहन से आठ दिन पहले से शुरू होता है। इस बार यह अवधि 24 फरवरी से 3 मार्च 2026 तक रहेगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार होलाष्टक के आठ दिन किसी भी शुभ कार्य के लिए उचित नहीं माने जाते, लेकिन भगवान की भक्ति और आराधना के लिए यह अत्यंत श्रेष्ठ समय होता है।

होलाष्टक का महत्व

होलाष्टक शब्द दो शब्दों ‘होली’ और ‘अष्टक’ से बना है, जिसका अर्थ है होली से आठ दिन पहले का समय। यह काल धार्मिक दृष्टि से अशुभ कार्यों को टालने और भक्ति, दान-पुण्य व साधना करने के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।

होलिका दहन इस साल 2 मार्च 2026 को होगा, और अगले दिन यानी 3 मार्च को होली का पर्व मनाया जाएगा। साल का पहला बड़ा उत्सव होने के कारण होली और होलाष्टक का महत्व और भी बढ़ जाता है।

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होलाष्टक में न करें ये 5 काम

  1. शुभ कार्य न करें: इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश, नया व्यवसाय, मकान या वाहन क्रय-विक्रय जैसे सभी शुभ कार्य निषेध हैं।

  2. सोलह संस्कार टालें: होलाष्टक के दिन किसी भी प्रकार के सोलह संस्कारों का आयोजन वर्जित माना जाता है।

  3. नवविवाहितों का ससुराल जाना: नवविवाहिता को अपने ससुराल की पहली होली देखने की मनाही है।

  4. गृह प्रवेश या भवन में प्रवेश: इस समय किसी भी नए घर में प्रवेश या भवन निर्माण से बचें।

  5. अंतिम संस्कार: अगर इस दौरान किसी की मृत्यु होती है तो विशेष शांति अनुष्ठान कराए जाते हैं, बिना अनुष्ठान के अंतिम संस्कार उचित नहीं माने जाते।

होलाष्टक में करें ये कार्य

  • भगवत भजन और पूजा: इस अवधि में भगवान की आराधना और वैदिक अनुष्ठान करने का विशेष महत्व है।

  • दान-पुण्य: गरीबों में अन्न, वस्त्र और आवश्यक वस्तुएं दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।

  • मंत्र जाप: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से रोगों से मुक्ति मिलती है और स्वास्थ्य अच्छा रहता है।

होलाष्टक की कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, राजा हिरण्यकश्यप ने प्रहलाद को भगवान विष्णु की भक्ति से दूर करने के लिए कठिन यातनाएं दीं। आठवें दिन बहन होलिका के आग में बैठाने के बावजूद प्रहलाद बच गए। इस घटना के कारण यह आठ दिन अशुभ माने जाते हैं और शुभ कार्य वर्जित किए जाते हैं।

होलाष्टक का पालन करने से जीवन में भक्ति, शांति और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। दान, सेवा और पूजा से व्यक्ति के कष्ट कम होते हैं और सुख-समृद्धि आती है।

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