हरियाणा में “स्पर्श कुष्ठ जागरूकता अभियान” की शुरुआत, भेदभाव खत्म कर रोगियों की गरिमा सुनिश्चित करने की अपील

हरियाणा में “स्पर्श कुष्ठ जागरूकता अभियान” की शुरुआत, भेदभाव खत्म कर रोगियों की गरिमा सुनिश्चित करने की अपील

हरियाणा में “स्पर्श कुष्ठ जागरूकता अभियान” 30 जनवरी से 13 फरवरी तक आयोजित, आरती सिंह राव की अपील: कुष्ठ रोगियों के प्रति भेदभाव खत्म करें और उनकी गरिमा सुनिश्चित करें। निःशुल्क जांच, इलाज और सहायक उपकरण उपलब्ध।

हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने राज्य की जनता से अपील की है कि कुष्ठ रोगियों के प्रति भेदभाव समाप्त किया जाए और उनकी गरिमा सुनिश्चित की जाए। उन्होंने बताया कि यह अभियान 30 जनवरी 2026 से शुरू होकर 13 फरवरी 2026 तक चलेगा।

स्वास्थ्य मंत्री ने महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के अवसर पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि गांधी जी कुष्ठ रोग से पीड़ित लोगों के प्रति करुणा और प्रेम रखते थे। उनका मानना था कि कुष्ठ रोग न तो अभिशाप है और न ही पाप, बल्कि यह एक आम बीमारी है। गांधी जी ने स्वयं सेवाग्राम आश्रम में कुष्ठ रोगियों की सेवा की और उनके घावों की देखभाल की।

आरती सिंह राव ने बताया कि राष्ट्रीय कुष्ठ रोग उन्मूलन कार्यक्रम के तहत वर्ष 2017 से हर साल “स्पर्श कुष्ठ जागरूकता अभियान” आयोजित किया जा रहा है। इस वर्ष 2026 का अभियान “भेदभाव समाप्त करें, गरिमा सुनिश्चित करें” के विषय पर आधारित है।

मंत्री ने कहा कि कुष्ठ रोग को लेकर समाज में कई भ्रांतियाँ हैं। इन गलत धारणाओं को दूर करने के लिए 30 जनवरी से 13 फरवरी तक राज्यभर में जागरूकता कार्यक्रम चलाया जाएगा। अभियान का उद्देश्य रोगियों के प्रति सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करना और किसी भी प्रकार का भेदभाव रोकना है।

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कुष्ठ रोग माइकोबैक्टीरियम बैक्टीरिया के कारण होता है और त्वचा तथा तंत्रिकाओं को प्रभावित करता है। यह रोग कम संक्रामक है—सामान्य सर्दी-खांसी से भी कम। किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, समय पर इलाज शुरू करने पर यह पूरी तरह ठीक हो सकता है और संक्रमण फैलने से रोका जा सकता है।

आरती सिंह राव ने कहा कि प्रारंभिक अवस्था में बहु औषधि चिकित्सा (MDT) से 6 से 12 महीने में कुष्ठ रोग का पूर्ण उपचार संभव है। हरियाणा में पिछले 10 वर्षों में 4,371 मरीजों का इलाज पूरा हो चुका है। सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में निःशुल्क उपचार उपलब्ध है। राज्य का लक्ष्य आने वाले वर्षों में हरियाणा को कुष्ठ रोग मुक्त बनाना है।

स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक डॉ. मनीष बंसल ने बताया कि स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर संदिग्ध मामलों की पहचान करते हैं। त्वचा पर हल्के पीले, लाल या तांबे के धब्बे और सुन्नपन कुष्ठ रोग के संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें। संदिग्ध मामले की सूचना देने पर ₹250 नकद पुरस्कार दिया जाएगा।

हरियाणा में वर्तमान में 338 कुष्ठ रोगियों का उपचार चल रहा है, जिनमें अधिकांश पड़ोसी राज्यों के निवासी हैं। सभी जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में निःशुल्क दवाएं, सहायक उपकरण, बैसाखी और स्व-देखभाल किट उपलब्ध कराई जा रही हैं।

इस अभियान के माध्यम से राज्य सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि कुष्ठ रोग से प्रभावित लोग सम्मानजनक जीवन जी सकें और समाज में उनके प्रति कोई भेदभाव न हो।

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