हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने 5,000 करोड़ रुपये के धान घोटाले के आरोपों का खंडन किया। उन्होंने किसानों को समय पर भुगतान, पोर्टल प्रणाली और मंडियों में सुधारों की जानकारी दी।
हरियाणा विधानसभा की कार्यवाही में विपक्ष ने राज्य में कथित धान खरीद घोटाले का मुद्दा उठाया। कांग्रेस विधायक आदित्य सुरजेवाला और अशोक अरोरा ने इस मामले पर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पेश किया।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का जवाब
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि धान की खरीद में किसी भी अनियमितता की स्थिति में सरकार ने समय रहते कार्रवाई की है। उन्होंने कांग्रेस द्वारा लगाए गए 5,000 करोड़ रुपये के घोटाले के दावे का पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस शासन के दौरान इससे भी बड़े घोटाले हुए थे।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पिछले चार वर्षों में धान खरीद के आंकड़े भी साझा किए:
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2021-22: 54.72 लाख मीट्रिक टन
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2022-23: 59.29 लाख मीट्रिक टन
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2023-24: 58.94 लाख मीट्रिक टन
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2025-26: 59.98 लाख मीट्रिक टन
बासमती धान की खरीद भी लगातार बढ़ रही है:
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2021-22: 34 लाख मीट्रिक टन
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2022-23: 35.36 लाख मीट्रिक टन
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2023-24: 42.55 लाख मीट्रिक टन
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2025-26: 44.84 लाख मीट्रिक टन
उन्होंने बताया कि पीआर धान का उत्पादन इस वर्ष लगभग 62.13 लाख मीट्रिक टन तक पहुंचने की उम्मीद है।
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पारदर्शिता और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि हरियाणा में धान की खरीद केंद्रीय एजेंसियों द्वारा की जाती है और राज्य सरकार ने प्रक्रिया में सुधार कर कमियों को दूर कर दिया है। मंडियों में धान के आगमन से लेकर चावल की वापसी तक जांच चौकियां स्थापित की गई हैं।
उन्होंने कहा कि किसानों का पंजीकरण ‘मेरी फसल मेरा ब्योरा’ पोर्टल पर होता है, जो क्षेत्र और उपज का सटीक डेटा प्रदान करता है। 2025-26 में 3.01 लाख किसानों ने इस पोर्टल के माध्यम से 13.62 लाख मीट्रिक टन धान बेचा। अगले सीजन में अनुमानित आवक 97.86 लाख मीट्रिक टन है।
सरकारी कार्रवाई और सुधार
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बताया कि खरीदी गई फसलों का भुगतान सीधे किसानों के बैंक खातों में किया जाता है। मंडियों का आधुनिकीकरण और अनियमितताओं का त्वरित समाधान किया जा रहा है। चावल मिलों के भंडारित धान का सत्यापन जिला स्तरीय समितियों द्वारा किया गया, जिसके परिणामस्वरूप:
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12 एफआईआर दर्ज
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75 अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई
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28 निलंबन
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6.37 करोड़ रुपये सरकारी खजाने में जमा
उन्होंने कहा कि बाजरा खरीद, जियो-टैगिंग, ई-गेट पास, बायोमेट्रिक सत्यापन, वाहन ट्रैकिंग और पोर्टल का IFMS के साथ एकीकरण हेराफेरी को रोकने के लिए किए गए हैं।
पिछली सरकारों की आलोचना
नायब सिंह सैनी ने कहा कि पहले किसानों को भुगतान के लिए छह महीने तक इंतजार करना पड़ता था, लेकिन वर्तमान सरकार ने पिछले 12 वर्षों में 1.64 लाख करोड़ रुपये सीधे किसानों के खातों में हस्तांतरित किए हैं। उन्होंने कहा, “हमारी नीतियां पारदर्शी और किसान-केंद्रित हैं।”