हरियाणा सरकार ने राज्य के हवाई अड्डों पर विमानन सुरक्षा और परिचालन मजबूत करने के लिए उच्च स्तरीय तकनीकी समिति बनाई। नए SOP और सुधार कार्यों से सुरक्षित उड़ान संचालन सुनिश्चित होगा।
हरियाणा नागरिक उड्डयन विभाग ने राज्य के हवाई अड्डों पर सुरक्षित उड़ान संचालन सुनिश्चित करने के लिए एक उच्च स्तरीय तकनीकी समिति का गठन किया है। इस समिति का मुख्य उद्देश्य डीजीसीए (DGCA) के दिशानिर्देशों के अनुसार मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करना और विमानन सुरक्षा व परिचालन तत्परता को और सुदृढ़ करना है। समिति का नेतृत्व हरियाणा नागरिक उड्डयन विभाग के उत्तरदायी प्रबंधक द्वारा किया जाएगा और इसमें अनुभवी विमानन विशेषज्ञ और योजना पेशेवर शामिल हैं।
मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में हुई वर्चुअल समीक्षा बैठक में राज्य के रनवे और हवाई अड्डों के रखरखाव, सुधार और विकास पर चर्चा की गई। बैठक में मुख्य सचिव ने कहा कि हवाई अड्डों का रखरखाव सतत और नियमित प्रक्रिया होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि विभाग पहले ही कई सुधार उपाय लागू कर चुका है, जिनमें रनवे की आवधिक मरम्मत और नियमित निरीक्षण शामिल हैं। अब इन प्रयासों को सुव्यवस्थित SOP ढांचे के माध्यम से और मजबूत किया जाएगा।
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बैठक में मुख्य सचिव ने लोक निर्माण विभाग (B&R), बागवानी शाखा और संबंधित उपायुक्तों को निर्देश दिए कि वे राज्य के सभी हवाई अड्डों में समन्वित और समयबद्ध रखरखाव सुनिश्चित करें। ये निर्देश भिवानी, नारनौल, पिंजोर और करनाल हवाई अड्डों पर लागू होंगे, जहाँ वर्तमान में सुधार और रखरखाव कार्य सक्रिय रूप से जारी हैं।
प्रमुख निर्देश और कार्य:
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सार्वजनिक परिवहन एवं यातायात विभाग (PWD) को रनवे और संबंधित बुनियादी ढांचे जैसे पुनर्निर्माण, चौड़ीकरण, रनवे शोल्डर निर्माण, रनवे मार्किंग, बाउंड्री वॉल, गार्ड रूम और परिधि सड़क का अनुमानित खर्च (RFO) तैयार करने के निर्देश।
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सभी स्वीकृत कार्यों का समय पर निष्पादन और मासिक निरीक्षण रिपोर्ट नागरिक उड्डयन विभाग और उपायुक्तों के साथ साझा करना।
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बागवानी शाखा को हवाई अड्डे के परिसर में नियमित वनस्पति सफाई, आवधिक छंटाई और परिचालन क्षेत्रों को बाधा-मुक्त बनाए रखने का कार्य।
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भिवानी, नारनौल, पिंजोर और करनाल के उपायुक्तों को अंतर-विभागीय समन्वय और आवश्यकताओं पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त करना।
हरियाणा सरकार का यह कदम राज्य के हवाई अड्डों पर विमानन सुरक्षा और परिचालन के मानकों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।