हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सोनीपत में 602 गोशालाओं के लिए 68.34 करोड़ रुपये का चारा अनुदान जारी किया। सौर ऊर्जा और गोवंश संरक्षण पर जोर।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सोनीपत के भठगांव में आयोजित समारोह में प्रदेश की 602 पंजीकृत गोशालाओं के लिए 68.34 करोड़ रुपये की चारा अनुदान राशि जारी की। उन्होंने बताया कि पिछले 11 वर्षों में प्रदेश की गोशालाओं को 525 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता प्रदान की जा चुकी है।
धर्मार्थ गोशाला परिसर में आयोजित राज्यस्तरीय चारा अनुदान वितरण कार्यक्रम में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल बडौली, कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा, मंत्री रणबीर गंगवा और मंत्री अरविंद शर्मा सहित अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कार्यक्रम में पारंपरिक स्वागत स्वीकार किया और प्रदेशवासियों को होली की शुभकामनाएं दीं।
होली के महापर्व की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ।
गौ माताओं के चारे के लिए आज प्रदेश की 602 पंजीकृत गौशालाओं को ₹68.34 करोड़ की अनुदान राशि वितरित की। pic.twitter.com/tsDWUIQqx4
— Nayab Saini (@NayabSainiBJP) March 3, 2026
सोनीपत की गोशालाओं को विशेष सहायता
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बताया कि सोनीपत जिले की 27 पंजीकृत गोशालाओं को 5.60 करोड़ रुपये की राशि प्रदान की गई। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में प्रदेश में 215 गोशालाएं थीं और लगभग 1.75 लाख गोवंश संरक्षित थे, जबकि अब 697 गोशालाओं में करीब चार लाख बेसहारा गोवंश का पालन-पोषण किया जा रहा है।
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सौर ऊर्जा और आत्मनिर्भर गोशालाएं
हरियाणा सरकार ने गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सौर ऊर्जा को बढ़ावा दिया है। वर्तमान में 330 गोशालाओं में सोलर प्लांट स्थापित किए जा चुके हैं और वर्ष 2026-27 तक सभी पंजीकृत गोशालाओं को सौर ऊर्जा आधारित बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा गोशालाओं को दो रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। गोवंश के स्वास्थ्य के लिए नियमित पशु चिकित्सकों की ड्यूटी और मोबाइल पशु चिकित्सालय की सुविधा भी उपलब्ध करवाई जा रही है।
बेलाही नस्ल और गोवंश संरक्षण
राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत हरियाणा में साहिवाल और बेलाही नस्ल के संरक्षण को प्रोत्साहन देते हुए गोपालकों को 5,000 से 20,000 रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जा रही है। मुख्यमंत्री ने हरियाणा गो-वध संरक्षण एवं गोसंवर्धन अधिनियम-2015 के प्रभावी क्रियान्वयन का उल्लेख करते हुए समाज से अपील की कि वे गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने में सहयोग करें।
इस पहल से प्रदेश के बेसहारा गोवंश को संरक्षित करने और गोशालाओं को मजबूत बनाने में बड़ी मदद मिलेगी, जिससे हरियाणा में पशुपालन और कृषि क्षेत्र में भी विकास को नई गति मिलेगी।