Sunday, May 10, 2026

हनुमान जयंती 2026: 1 अप्रैल या 2 अप्रैल कब मनाया जाएगा हनुमान जन्मोत्सव, जानिए पूजा और शुभ उपाय

by Neha
हनुमान जयंती 2026: 1 अप्रैल या 2 अप्रैल कब मनाया जाएगा हनुमान जन्मोत्सव, जानिए पूजा और शुभ उपाय

जानिए हनुमान जयंती 2026 की सही तारीख और विशेष पूजा विधि। 2 अप्रैल को मनाए जाने वाले हनुमान जन्मोत्सव पर चोला अर्पित करें, भोग लगाएं और हनुमान चालीसा का पाठ करें।

हनुमान जयंती 2026 को लेकर लोगों में भ्रम है कि यह 1 अप्रैल को है या 2 अप्रैल को। हर साल चैत्र माह की पूर्णिमा पर मनाए जाने वाले इस पवित्र पर्व को इस साल 2 अप्रैल 2026 को मनाना शुभ माना गया है।

हनुमान जी का जन्मोत्सव न केवल भक्ति का प्रतीक है बल्कि जीवन में बल, बुद्धि और साहस की प्राप्ति का अवसर भी है। आइए जानते हैं इस दिन करने योग्य विशेष उपाय और पूजा विधि।

हनुमान जयंती 2026 की सही तारीख

  • चैत्र पूर्णिमा प्रारंभ: 1 अप्रैल 2026, सुबह 7:06 बजे
  • चैत्र पूर्णिमा समाप्त: 2 अप्रैल 2026, सुबह 7:41 बजे

धार्मिक पंचांग और उदय तिथि के अनुसार, हनुमान जयंती 2 अप्रैल 2026 को मनाई जाएगी।

हनुमान जयंती पर करें ये विशेष उपाय

हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए इस दिन कुछ विशेष पूजा विधियाँ अपनाई जाती हैं:

1. चोला अर्पित करना

  • सुबह स्नान कर साफ कपड़े पहनें; लाल रंग के वस्त्र पहनना शुभ है।
  • सिंदूर और चमेली के तेल का मिश्रण तैयार करें और हनुमान जी के मूर्ति या चित्र पर लगाएं।
  • इस दौरान “ॐ हनुमंते नमः” का जाप करें।

2. भोग अर्पित करना

  • हनुमान जी को लड्डू का भोग अर्पित करना अत्यंत शुभ है।
  • फूल, वरक और जनेऊ भी अर्पित कर सकते हैं।

3. हनुमान चालीसा और आरती

  • हनुमान चालीसा का पाठ करें और पूजा के अंत में हनुमान जी की आरती करें।

इन उपायों से भक्तों को संकट निवारण, मानसिक शक्ति और विद्या की प्राप्ति होती है।

हनुमान जयंती का महत्व

हनुमान जयंती केवल भगवान हनुमान के जन्म का पर्व नहीं है। यह भक्ति, शक्ति और साहस का प्रतीक है। इस दिन पूरे देश में भक्त व्रत रखते हैं और हनुमान जी की विशेष पूजा करते हैं। हनुमान जयंती का उद्देश्य केवल जन्मोत्सव मनाना नहीं है, बल्कि इससे भक्तों को जीवन में सकारात्मक बदलाव, संकटों से मुक्ति और आंतरिक शक्ति प्राप्त होती है। हनुमान जी की कृपा से व्यक्ति अपने जीवन में मानसिक शांति, साहस और विद्या की प्राप्ति कर पाता है। यही कारण है कि यह पर्व हर वर्ष भक्ति और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।

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