हनुमान जी (Hanuman Ji) को कलयुग के जाग्रत देवता माना जाता है। उनकी भक्ति के लिए हनुमान चालीसा का नियमित पाठ सबसे प्रभावशाली और सरल उपाय है। धार्मिक मान्यता है कि इसका नियमित पाठ करने से सभी भय, संकट और मानसिक परेशानियाँ दूर होती हैं। लेकिन अक्सर भक्त अनजाने में कुछ गलतियां कर देते हैं, जिससे हनुमान चालीसा का पूर्ण लाभ नहीं मिल पाता।
हनुमान चालीसा पाठ के महत्वपूर्ण नियम
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शुद्धता और अनुशासन: हनुमान जी की पूजा में शुद्ध मन और तन का होना अत्यंत आवश्यक है। पाठ करने से पहले स्नान अवश्य करें और मन को पूरी तरह शांत रखें। अशुद्ध अवस्था में या बिना स्नान किए पाठ करने से इसे अधूरा माना जाता है।
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एकाग्रता बनाए रखें: पाठ के दौरान कभी भी बीच में उठना, बातचीत करना या अन्य कार्य करना नहीं चाहिए। इससे आपकी एकाग्रता भंग होती है और हनुमान जी की कृपा का पूर्ण लाभ नहीं मिलता।
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विशेष परिस्थितियों में पाठ से बचें:
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जिस घर में सूतक लगा हो, यानी किसी का जन्म या मृत्यु हुई हो।
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यदि आपने मांसाहार या मदिरा का सेवन किया हो।
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ऐसे समय में पाठ करना अशुभ माना जाता है।
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हनुमान चालीसा पाठ की सही विधि
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बैठने का स्थान: लाल आसन पर बैठें और सामने हनुमान जी की प्रतिमा या चित्र रखें।
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पूजा प्रारंभ: पाठ शुरू करने से पहले गणेश जी और अपने कुलदेवता का स्मरण करें।
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दीपक और भोग: यदि संभव हो, तो हनुमान जी के सामने चमेली के तेल का दीपक जलाएं। पाठ समाप्ति पर गुड़ और चने का भोग लगाना अत्यंत फलदायी होता है।
मंगलवार को पाठ करते समय विशेष ध्यान
मंगलवार हनुमान जी का विशेष दिन माना जाता है। इस दिन पाठ करते समय मन और वातावरण दोनों शुद्ध रखें। सुबह का समय या प्रातःकाल का समय पाठ के लिए उत्तम माना जाता है।