गुरुग्राम में सोहना एलिवेटेड फ्लाईओवर से एक वीडियो ने सड़क सुरक्षा और ट्रैफिक नियमों पर सवाल उठाए हैं। जबकि इस फ्लाईओवर पर गाड़ी चलाना प्रतिबंधित था, एक ऑटो में दो दर्जन से अधिक लोग सवार नजर आए।
गुरुग्राम की सड़कों से एक भयानक चित्र सामने आया है जिसे देखकर कोई भी घबरा जाएगा। इसमें दिखाई देता है कि एक छोटे से ऑटोरिक्शा में क्षमता से कई गुना अधिक लोग सवार हैं। लोगों ने हर जगह देखा, ऑटो के अंदर, पीछे और छत के ऊपर। रात के अंधेरे में एलिवेटेड फ्लाईओवर पर चलना बहुत खतरनाक लगा। दिल्ली-एनसीआर में हर दिन सड़क दुर्घटनाएं होती हैं।
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3 सीटर ऑटो में 24 से अधिक खिलाड़ी
जिस ऑटो का वीडियो सामने आया है, उसमें तीन लोग सवार हो सकते हैं, लेकिन वीडियो में 24 से अधिक लोग सवार दिखाई देते हैं। वीडियो में सभी युवा खिलाड़ी एक ऑटो में सवार होते हैं, जब वे अपना खेल खत्म करके वापस सोहना की ओर लौट रहे हैं। वाहन का संतुलन इतनी अधिक सवारियों के साथ बिगड़ने की आशंका के कारण कुछ मिनट का यह सफर उनके लिए बहुत खतरनाक था। यद्यपि जीत या पराजय का उत्साह अलग है, इन खिलाड़ियों ने कुछ मिनटों के लिए अपनी जिंदगी को दांव पर लगा दिया।
फ्लाइओवर पर ऑटो का प्रवेश प्रतिबंधित
गुरुग्राम-सोहना एलिवेटेड फ्लाईओवर पर, जहां ऑटो रिक्शा पूरी तरह से प्रतिबंधित हैं, यह खतरनाक सफर तय किया जा रहा था। बैन के बावजूद ऑटो के वहां आने से ट्रैफिक नियमों का पालन करना मुश्किल है। यह सिर्फ ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन नहीं है; यह रात के अंधेरे में सीधे यमराज के दरबार की टिकट कटाने की तरह है। जहां एक साधारण ऑटोरिक्शा को रातों-रात ‘डबल डेकर गाड़ी’ बनाया गया
नंबर प्लेट भी नजर नहीं आई
वीडियो में ऑटो के पीछे और आगे नंबर प्लेट भी नहीं दिखाई देते। यानी वाहन में क्षमता से कई गुना अधिक सवारियां थीं, लेकिन नंबर प्लेट नहीं थे। ऐसी स्थिति रात के अंधेरे में तेज रफ्तार फ्लाईओवर पर बड़े हादसे की वजह बन सकती थी। यदि कार का संतुलन कुछ भी बिगड़ता, तो भयानक हादसा होना तय था।
कार्रवाई की बढ़ती मांग
यह घटना गुरुग्राम की आधुनिक ट्रैफिक पुलिस पर गंभीर सवाल खड़े करती है, जो न सिर्फ ऑटो चालकों और सवारियों की लापरवाही को दर्शाती है। सड़क पर किया गया यह खतरनाक स्टंट किसी को भी मार सकता था। घटना का वीडियो सामने आने के बाद, ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन का मुद्दा चर्चा में है। लोगों का कहना है कि ऐसे मामलों में नियमों का पालन सुनिश्चित करने वालों पर कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि सड़कों पर ऐसे जोखिम भरे रास्ते फिर से न देखे जाएं।